Mobile Technology: इतिहास और कार्य सिद्धांत

नमस्ते दोस्तों, आज मैं उस तकनीक के बारे में चर्चा करने जा रहा हूं, जो आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है---मोबाइल या सेल फोन.

History

आप सभी ये जानते हैं की टेलीफोन का अविष्कार Alexander Graham Bell ने 1876 में किया था, पर क्या आपको पता है की वायरलेस मोबाइल फ़ोन टेक्नोलॉजी आप तक कैसे आयी. तो आइए जानते हैं इसके बारे में.

सर्वप्रथम मोबाइल फ़ोन के विकास का आईडिया 1970 में Bell Labs, Murray Hill, New Jersey में काम कर रहे  engineer, Amos Joel, को आया था और उन्होंने इसके वर्किंग प्रिंसिपल का मैकेनिज्म भी दिया. इससे पहले भी रेडियो कम्युनिकेशन आधारित सेल फ़ोन का इस्तेमाल होता था, पर उसमे बहुत सारी दिक्कतें थी जैसे की जो सेल फ़ोन जिस बेस स्टेशन के साथ रजिस्टर्ड है, वो सिर्फ उसी बेस स्टेशन के रेंज में काम कर सकता है, ट्रैवेलिंग के साथ उस फ़ोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था. Amos Joel ने कहीं भी काम करने वाली रेडियो कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का आधार रखा. पर सार्वजनिक रूप से सेल फ़ोन का अविष्कार 1973 में Martin Cooper, CEO Motorola, और John Francis Mitchell, Chief Engineer Motorola के द्वारा किया गया या यूँ कहें की पहली मोबाइल बनाने वाली कंपनी Motorola थी, जिसने April 3, 1973 को पहला सेल फ़ोन लांच किया था. 

Indicative Image of Mobile Phone


Work Principle

मोबाइल या सेल  फ़ोन  मूल रूप से रेडियो सिग्नल संचार पद्धति पर काम करता है. जब भी आप अपने फ़ोन को स्विच ऑन मोड में रखते हो, ये रेडियो सिग्नल अपने नजदीकी बेस स्टेशन को भेजता और प्राप्त करता है और इस कार्य को आपके फ़ोन में लगे  Global System for Mobile (GSM) Module का transmitter antenna करता है जिसमे सिग्नल को transmit और  receive करने की क्षमता होती है, पर ये कार्य बिना Subscriber Identity Module (SIM) कार्ड के नहीं हो सकता क्योंकी नेटवर्क को identify करना और उससे connect होने के लिए सिग्नल SIM कार्ड ही GSM Module की मदद से generate करता है, SIM कार्ड में कुछ storage capacity भी होती है. ये सभी कार्य GSM Module से होते हैं या यूँ कहें की GSM Module सेल फ़ोन सबसे जरुरी हिस्सा है.

अब जानते हैं की सिग्नल ट्रांसमिशन होता कैसे है और ये किस प्रकार का होता है. तो जब भी कोई आपके नंबर पे कॉल करता है तो उसका फ़ोन रेडियो सिग्नल को उसके पास वाले बेस स्टेशन को भेजता है, और वो बेस स्टेशन उस सिग्नल को ट्रांसमीटर चैनल टावर या सॅटॅलाइट को भेजता है, अब ये उस सिग्नल को आपके नजदीकी बेस स्टेशन को ट्रांसमिट करता है, और आपके पास का बेस स्टेशन आपके फ़ोन पे वो सिग्नल ट्रांसमिट करता है और इस प्रकार दोनों फ़ोन के बिच संवाद स्थापित होता है. ये कम्युनिकेशन two-way कम्युनिकेशन होती है.

मूख्यतः कम्युनिकेशन  के दो प्रकार होते हैं --- one-way  और  two-way. One-way कम्युनिकेशन में एक समय में एक ही कार्य होता है या तो transmission  या  receiving और two-way कम्युनिकेशन में दोनों काम एक साथ होतें है. 

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