एक आत्मा की विरक्ति: Detachment of a Soul | Hindi Story

दोस्तों एक समय की बात है, एक व्यक्ति सुबह सुबह अपने ऑफिस के लिए अपने घर से निकला, दुर्भाग्यपूर्ण रास्ते में अचानक ही उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया और उस व्यक्ति की मृत्यु हो गयी. थोड़े ही समय के बाद उसकी आत्मा उसके शरीर को छोड़कर बाहर आ चुकी थी, तभी उस आत्मा ने देखा की उसके शरीर के पास बहुत भीड़ इकठ्ठा हो चुकी है और कोई एम्बुलेंस को बुला रहा है तो कोई पुलिस को फ़ोन कर रहा है, पर कोई किसी समस्या के डर से उसे हाथ भी नहीं लगा रहा. वो आत्मा अपने शरीर में फिर से जाने को तड़प रही थी पर किसी अनजानी ताकत ने उसे रोक रखा था, उसने उस अनजानी शक्ति से बहुत आग्रह किया की मुझे वापस जाने दो उस पर उस शक्ति ने उसे कहा की कुछ समय रुको, उसके बाद मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा. इसी दरम्यान उसके लाश के पास पुलिस और एम्बुलेंस दोनों आ गए पुलिस की कुछ जाँच पड़ताल के बाद एम्बुलेंस उसे हॉस्पिटल लेकर गयी, तब तक उसके परिवार वाले भी हॉस्पिटल आ चुके थे. वो हॉस्पिटल भी शहर का नामचीन हॉस्पिटल था, जब उस व्यक्ति की लाश वहां पहुंची तो डॉक्टर्स ने उसे क्रिटिकल केस बता कर उसे एडमिट कर लिया, यह देखकर उस आत्मा को बड़ा आश्चर्य हुआ की जब मैं मर चूका हूँ, फिर भी अस्पताल वालों ने मुझे एडमिट क्यों किया। अस्पताल वाले 2 दिनों तक उसकी लाश को वेंटीलेटर पे रखने के बाद उसके परिवार वालों को अच्छा खासा बिल थमा कर उसे मरा हुआ बता दिया, यह सब  देखकर उस आत्मा को बहुत दुःख हुआ और वह फिर से अपने शरीर में वापस आने की कोशिश करने लगा, पर वह ऐसा कर नहीं पा रहा था. 

उसके परिवार वाले जब उसकी लाश को लेकर अश्मशान पहुंचे तो मानों वहां उपस्थित लोग, जो शरीर के जलाने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं, यह सोंचकर बहुत खुश हुए की एक और पैसे का स्रोत उनके पास आया है और वे इस काम के लिए उसके परिवार वालों से मुंहमांगी कीमत मांगने लगे, परिवार वालों ने कही कम कहीं अधिक पैसे देकर उसका अंतिम संस्कार किया। यह देखकर वह आत्मा और भी दुखी हो गयी की कुछ लोग उसके मरने से भी खुश नजर आ रहे, फिर भी उसकी इक्षा अपने शरीर में वापस जाने की कम नहीं हुई थी, और उसने उस अनजानी ताकत से पूछा की अब तो मेरा शरीर जलकर राख हो चूका है, अब मैं वापस कैसे जाऊंगा, उसके इस बात का उस शक्ति ने मुस्कुराकर जवाब दिया कुछ दिन और ठहर जा. 

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अब वह अपने परिवार वालों के साथ वापस अपने घर जाने लगा, और घर पहुँचने पर उसने देखा की जो लोग कुछ समय के लिए उसके मौत पर चीख चीख कर रो रहे थे, अब सभी अपने कामों में लगे हैं और उसके श्राद्ध की तैयारियां शुरू हो चुकी है. अगले सुबह जब उसके घर वालों ने अपने समाज को श्राद्ध कार्यक्रम और होने वाले भोज पर चर्चा करने के लिए बुलाया तो वहां लोग इसी मंशा से आये थे की भोज में अपना मनपसन्द भोजन बनवाना है, वहां आया नाइ, पंडित सभी इसी स्वार्थ से उसके श्राद्ध में शामिल हुए की वो उसके परिवार से ज्यादा से ज्यादा वस्तु ले सकें. भोज की चर्चा में भी लोगों ने उसके परिवार की क्षमता को जाने बिना तरह तरह के भोजन की फरमाईश की. समाज के इस व्यवहार को देखकर वह आत्मा अत्यंत दुखी हो गयी, और उसके अंदर फिर से जीने की इक्षा कम होने लगी. 

धीरे धीरे उसके घर में दूर के रिश्तेदारों का जमावड़ा लगने लगा, पर जो भी उसके घर आ रहा था बस अपने पसंद के खाने और सोने की ही चिंता कर रहा था. किसी का दिल उसके मौत से उतना दुखी नहीं था, जितना वह सोंच रहा था, कुछ रिस्तेदार तो शराब तक की फरमाईश कर रहे थे, दिन बीतता गया और आज उसके घर में उसके बारहवीं का भोज था, समाज के लोग बड़ी ख़ुशी से आये, जमकर खाया, कमियां भी निकाली और जिन्हे उनका मनपसंद भोजन नहीं मिल पाया उनलोगों ने तो उसके मरने के बाद भी उसे गालियां दी, वही हाल नाइ, पंडित, और अन्य लोगों का भी था. रात में भोज ख़त्म होने के बाद कुछ रिस्तेदार शराब के साथ मानों ऐसे जश्न मना रहे थे जैसे वो किसी शादी में शामिल हुए हों. इन सब घटनाओं और लोगों के गिरे हुए स्वार्थ और भावनाहीनता, जो वह जीते जी नहीं देख पाया, को देखकर उस आत्मा की फिर से जीने की इक्षा समाप्त हो गयी और वह जिंदगी की माया से विरक्त हो गया. अब उस अनजानी शक्ति के ये पूछे जाने पर की क्या अब वह फिर से जीना चाहता है, उसने इसका जवाब "ना" में दिया और वह ख़ुशी ख़ुशी दूसरे संसार की ओर चल पड़ा.  

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