डस्टबिन (Dustbin): क्या भूख (hunger) एक श्राप है? | Hindi Story

आज जब रघु ऑफिस से घर के लिए जा रहा था, तभी अचानक रास्ते में उसे एक शोर सुनाई दी उसने अपनी बाइक को सड़क किनारे रोका और देखा की एक बच्चा जो 7-10 साल का होगा, सड़क किनारे पड़े डस्टबिन (Dustbin) के पास एक कुत्ते से एक रोटी, जो उस कुत्ते के मुँह में थी, छीनने की कोशिस कर रहा है.  ये दृश्य देखने के बाद रघु  बहुत ही ज्यादा भावुक हो गया. उसने उस बच्चे को अपने पास बुलाया और पूछा - तुम एक रोटी के लिए कुत्ते से क्यों लड़ाई कर रहे थे. बच्चे ने जवाब दिया - साहब दो दिनों से भूखा हूँ, आज कोई डस्टबिन के पास रोटी फेक गया तो वो भी मेरे नशीब में नहीं था और उसे भी कुत्ता खा गया. यह सुनकर रघु के मन में बच्चे को लेकर कई सवाल आने लगे और वह बच्चे के साथ सड़क किनारे बैठ कर बातें करने लगा. 

रघु: तुम्हारा नाम क्या है और तुम रहते कहाँ  हो?
बच्चा: साहब मेरा नाम तो मुझे नहीं पता पर लोग मुझे भिखारी कहकर बुलाते हैं, और मैं यहीं इस फुटपात पे ही रहता हूँ. 

रघु: तुम कहीं कुछ काम क्यों नहीं कर लेते जिससे तुम्हे कम से कम खाना तो मिल जाया करेगा? 
बच्चा अपनी दायीं हाँथ रघु को दिखाते हुए, जो आधी कटी हुई थी,  कहता है, लोग अपाहिज को काम नहीं देते साहब, यह देखकर रघु के पैरों तले जमीन खिसक गयी और वह उस बच्चे की हाँथ को ही देखता रह गया. 

थोड़ी देर के बाद फिर रघु ने बच्चे से पूछा, तुम्हारी ये हालत देखकर तो किसी को भी दया आ जाएगी, तो जब तुम्हे भूख लगती तो किसी से खाने को क्यों नहीं मांग लिया करते? 

रघु के इस सवाल का भी जवाब उस बच्चे के पास था - उसने रघु को कहा साहब यहाँ पर हर कोई दयालु नहीं होता जब किस्मत में रोटी होती है तो कोई वैसा मिल जाता है, जो कुछ खाने को दे जाता है, पर जब किस्मत में रोटी नहीं होती तो कोई ऐसा भी मिलता है जो खाना देने के बजाय डांट या थप्पड़ दे जाता है. और जब पेट की भूख के आग से  तड़प उठता हूँ तब मैं इसी डस्टबिन के पास मन में ये आशा लेकर आता हूँ की कोई तो कुछ खाने का फेंक गया होगा. पर आज मेरी किस्मत में तो वो भी नहीं था. 

उस बच्चे के जवाब को सुनकर रघु के आँशु रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, उसे उस बच्चे की हालत और किस्मत दोनों पे बहुत दया आ रही थी. रघु उस बच्चे को अपने साथ पास के होटल में ले गया और उसे पेट भरकर खाना खिलाया और उसे कुछ नकद पैसे भी दे दिए की जब उसे कुछ खाने को न मिले तो वो इस पैसे से खरीदकर कुछ खा ले और रघु उस बच्चे को वहीँ छोड़कर अपने घर के लिए निकल पड़ा. 

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रघु पे इस घटना ने बहुत ही गहरा असर डाला था, उसके दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी की ऊपरवाले के बनाये हुए किस्मत का भी खेल अजीब है--- कोई रोटियां ज्यादा होने पर डस्टबिन में फेंक आता है और कोई उसी रोटी के लिए डस्टबिन की छान मारता फिरता है. पूरी रात रघु उस बच्चे के बारे में सोंचता रहा और अगले सुबह जब उसकी पत्नी उसके लिए लंच तैयार कर रही थी तो उसने पत्नी से चार रोटी ज्यादा बनवाये और रास्ते में उस बच्चे को रोटी देता हुआ वो ऑफिस गया. अब हर रोज जब वह सुबह ऑफिस के लिए जाता, उस बच्चे के लिए रोटी ले जाना नहीं भूलता. 

दोस्तों इस कहानी के माध्यम से मैं यही सन्देश देना चाहता हूँ की अगर ऊपरवाले ने आपको पर्याप्त साधन दिए हैं तो आप भी किसी ऐसे जरूरतमंद की मदद करने से मत चूकिए, और उन्हें ये मत एहसास होने दीजिये की उनकी भूख उनके लिए एक श्राप है. 

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की ये story आपको पसंद आयी होगी, और भी नयी नयी जानकारी और मोटिवेशनल कहानी के लिए हमारा फेसबुक पेज Rehisvention जरूर like करें। 




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