Nepotism: भारतीय समाज पर काला धब्बा | Hindi Story

अभी अभी राहुल अपने कॉलेज में हुए convocation (दीक्षांत समारोह) से घर वापस लौटा ही था की उसे एक बड़ी कंपनी से जॉब का ऑफर भी मिल गया जिसकी इंटरव्यू उसने कॉलेज टाइम में ही दे रखी थी. कंपनी वालों की तरफ से उसे जल्द से जल्द जॉब ज्वाइन करने को पूछा गया, राहुल ने भी कुछ दिनों का समय लेकर ज्वाइनिंग की तारीख कन्फर्म कर दी. वो इस ऑफर से बहुत खुश था, क्यूंकि जैसा जॉब वह चाहता था उसे वो मिल गयी. कुछ दिनों के बाद उसने ऑफिस ज्वाइन कर लिया। आज ऑफिस का पहला दिन था, राहुल अपने काम को लेकर अंदर ही अंदर बहुत उत्तेजित था, थोड़े ही देर में उसके एक दो हमउम्र फ्रेंड भी बन गए, जो वहां पर पिछले 1 साल से कार्यरत थे. अगले दिन जब राहुल लंच के बाद अपने दोस्तों से बातें कर रहा था तो उसी दौरान 1 दोस्त ने उससे कहा - "इस कंपनी में तो सब कुछ ठीक है, पर यहाँ पे nepotism (स्वजन-पक्षपात) का माहौल बहुत ज्यादा है. 

राहुल बहुत ही लगनशील, मेहनती, और प्रतिभावान लड़का था, उसे हमेशा से अपने काम पे विश्वास था, इसलिए उसने इन सब बातों को सुनकर अनसुना कर दिया। राहुल के साथ उसके डिपार्टमेंट में 4 और लड़कों ने भी उसी के साथ जॉब ज्वाइन किया था, जिसमे 1 उस कंपनी के manager का रिश्तेदार था और उसने नौकरी भी उसी मैनेजर के शिफारिश पे ली थी, उन चारों में राहुल ही सबसे प्रतिभावान था. अभी सारे अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रहे थे. राहुल को अपना काम बहुत पसंद आया और जल्द ही वो सारे कामों को सिख भी गया.

कुछ दिनों के बाद सभी की ट्रेनिंग पूरी हो गयी और अब उन्हें कंपनी के प्रोजेक्ट्स पे काम करना शुरू करना था. अगले दिन जब राहुल अपने ऑफिस आया, तो मैनेजर ने उसे अपने कमरे में बुलाया और उसे 1 प्रोजेक्ट पे काम स्टार्ट करने को कहा, और मैनेजर ने उसे ये भी बताया की उसने इस प्रोजेक्ट में राहुल के साथ सुनील (जो मैनेजर का रिश्तेदार था) को भी रखा है. आज से राहुल अपने प्रोजेक्ट के काम में लग गया, और वो बड़ी ईमानदारी से उस काम को perfectly complete करने के लिए पुरे दिन जीतोड़ मेहनत करने लगा पर वहीँ सुनील इस काम में थोड़ा भी हाँथ नहीं बटांता, पुरे दिन इधर उधर गप्पे मारने में बिता देता। इधर राहुल अकेले ही पुरे काम को समय से पहले पूरा कर देता।

कुछ दिनों में राहुल का प्रोजेक्ट पूरा ही होने वाला था की अचानक उसके घर से उसके माँ का फ़ोन आता है - "पिताजी की तबियत बिगड़ती जा रही है, तू छुट्टी लेकर घर आ जा". राहुल अपने ऑफिस से तत्काल छुट्टी लेकर अपने घर को निकल पड़ा. पर उससे पहले उसने सुनील को प्रोजेक्ट के बचे हुए काम समझा गया था और उसे ये भी बोल गया था की कोई problem हो तो फ़ोन कर लेना. इधर सुनील प्रोजेक्ट पे बिना कुछ काम किये आधा अधूरा काम कंपनी को दे दिया, जिसके कारण कंपनी के मालिक को भाड़ी नुकसान उठाना पड़ा. कंपनी का मालिक बहुत गुस्से में था, उसने मैनेजर से उसका नाम माँगा जो उस प्रोजेक्ट पे काम कर रहा था. मैनेजर ये जानते हुए भी की सारी गलती सुनील की है उसे बचाने के लिए मालिक को राहुल का नाम दे दिया और कंपनी के मालिक ने राहुल को जॉब से निकाल दिया.

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उधर राहुल के पिता का देहांत हो चूका था और वो अपने पिता के श्राद्ध कर्मों में लगा था, अचानक जब उसे पता चला की उसकी नौकरी चली गयी है तो वह थोड़ा दुखी हुआ पर उस मैनेजर के व्यवहार ने उसे बहुत दुखी किया पर उसे अपने आप पे विश्वास था की वह दूसरी जॉब ढूंढ लेगा. कुछ दिनों के बाद वो अपने घर के सारे काम ख़त्म कर शहर लौट आया और अपने लिए दूसरी नौकरी ढूँढनी शुरू कर दी. अब वह हर रोज इंटरव्यू के लिया जाता पर कहीं जगह न खाली होने के कारण निराशा ही हाथ लगती, धीरे धीरे वह समय के साथ अपनी हिम्मत हारने लगा जिसके कारण अब उसका कॉन्फिडेंस भी काम होने लगा और उसे जीवन में सिर्फ अन्धकार नजर आने लगे, उसे अब कोई भी चीज अच्छी नहीं लगती वो अपना सारा समय एक बंद कमरे में बिताता, उसने मन ही मन ये सोंच लिया की अगर अगले कुछ दिनों के अंदर उसे नौकरी नहीं मिली तो वो आत्महत्या कर लेगा.

एक दिन जब वह अपने कमरे के छत से सड़क पर कूदकर अपनी जान देने की तैयारी कर ही रहा था की उसकी नजर एक ऐसे इंसान पर पड़ी जिसके दोनों हाँथ कटे थे और वह अपनी शऱीर से रस्सी बांधकर सामानों से लदे ठेले को खींचता हुआ सड़क पे जा रहा था. जिसे देखकर उसे अपना दुःख उसके सामने छोटा सा तिनका नजर आने लगा, और उसने ये सोंच कर अपने दिमाग से मरने की बात बाहर निकाल दी की अब वह सिर्फ मेहनत करेगा उस मेहनत के result के बारे में कभी नहीं सोंचेगा, क्युँकि result तो ऊपर वाले के हाँथ में है और उससे ज्यादा मेहनत करने वाले लोग भी उससे ज्यादा गरीब और बेबश हैं.

अब वह बस सिर्फ अपने लक्ष्य के पीछे मेहनत करता और भविष्य की चिंता नहीं करता. कुछ दिनों के बाद उसे फिर से एक अच्छी नौकरी मिल गयी और वह एक आराम की जिंदगी जीने लगा.

दोस्तों इस कहानी के माध्यम से मैं ये बताना चाहता हूँ की कैसे nepotism एक अच्छे खासे टैलेंट को अपनी जिंदगी तक गंवाने पर मजबूर कर देती है. पर हमे इस कहानी से शिक्षा लेते हुए हालातों से हारना नहीं लड़ना है, हालात समय के साथ बदल जातें हैं पर आपको ये जिंदगी दुबारा नहीं मिलेगी. 

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की ये story आपको पसंद आयी होगी, और भी नयी नयी जानकारी और मोटिवेशनल कहानी के लिए हमारा फेसबुक पेज Rehisvention जरूर like करें। 

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