कर्मों की सजा (Result of Deeds) | Hindi Story

सेठ हीरालाल शहर का सबसे बड़ा व्यापारी था, शहर के बीच में उसकी सबसे बड़ी दूकान थी. जगदीश और श्याम उसके दो बेटे थे, पर दोनों के बीच में संस्कार बहुत बड़ा फासला था. जगदीश जहाँ लालची और दुष्ट था वहीँ श्याम बहूत  सीधा और दयालु था. दोनों भाइयों में जगदीश बड़ा था और श्याम अपने बड़े भाई की बहुत इज्जत करता था भले ही उसके बड़े भाई के करतूत खराब थे. श्याम पढाई में भी अव्वल था और बड़ा होकर अपने दम पर कुछ करना चाहता था, वहीँ जगदीश की नजर अपने पिता की संपत्ति पर थी और उसे इसपर घमंड भी था. समय बीतता गया और दोनों भाई अब बड़े हो चुके थे. जगदीश अपने पिता के कारोबार में हाथ बटाता और श्याम कॉम्पिटिशन की तैयारी में लगा रहता और खाली समय में लोगों की मदद करता। 

सेठ की मौत के बाद जगदीश पुरे कारोबार का एकलौता मालिक हो गया था, उधर श्याम एक अच्छी नौकरी पाकर सुकून की जिंदगी बसर कर रहा था. जगदीश अपने व्यवसाय के साथ पैसे भी ब्याज पे लगाता, और जो उसके पैसे नहीं चूका पाते वो उनकी जमीन या घर कुछ बदमाशों की मदद से छीन लेता और उसे अपने नाम करवा लेता था. दौलत के घमंड में वो शहर में जिस किसी से उलझ जाता और उनको पैसे के बल पर डराता धमकाता रहता. शहर के लोग उसके इस करतूत से परेशान रहते पर कोई उसके दौलत की ताकत के आगे कुछ बोलता नहीं। उधर जो लोग जगदीश के दिए कर्ज को नहीं चूका पाते वो मदद के लिए श्याम के पास जाते, और श्याम उन्हें पैसों की मदद कर उनको जगदीश के कर्ज से मुक्त कराता, पर अपने संस्कार के कारण बड़े भाई को कभी कुछ नहीं बोलता। 

समय के साथ जगदीश ने बुरे कर्मों से बहुत पैसे कमाए और उधर श्याम विरासत में मिली पिता की संपत्ति को भी लोगों की मदद में लगाता चला गया, वो रहने के लिए सरकारी फ्लैट और जीवन यापन के लिए अपने वेतन का ही उपयोग करता था, उसमे से भी कुछ वो जरुरतमंदो को ही दे देता था. उसके रिश्तेदार भी पैसों के लोभ में जगदीश का ही गुणगान करते और श्याम को हिन् भावना से देखते, कुछ रिश्तेदार तो उसे निकम्मा नकारा तक भी कह देते। पर श्याम को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था, वह अपने जीवन से संतुष्ट था. और कुछ रिश्तेदार जो श्याम को समझते थे वो श्याम का बहुत आदर करते। समाज में भी लोग भले ही जगदीश के दौलत के कारण उसके सामने कुछ नहीं बोलते पर मन ही मन सभी श्याम का ही आदर करते थे.

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एक बार दोनों भाई साथ में किसी रिस्तेदार के यहाँ फंक्शन में गए हुए थे, वहां पहुँचने पर सारे रिश्तेदार जगदीश की आवभगत में लग गए, श्याम के तरफ किसी की नजर भी नहीं गयी, इस बात से उसे थोड़ा दुःख तो हुआ पर वो जानता था की "लोग इंसान को नहीं उसके दौलत को पहचानते हैं". उसने फंक्शन का सारा समय अकेले एक कोने में बैठकर बिताया। फंक्शन खत्म होने के बाद जब दोनों भाई घर वापस आ रहे थे तभी उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर उनके कार का एक्सीडेंट हो गया. आसपास के लोग जब कार के पास पहुंचे तो देखा दोनों खून से लथपथ बेहोश कार में पड़े थे. वहां मौजूद सभी लोग श्याम और जगदीश को जानते थे. और सभी बस श्याम को ही कार से बाहर निकालने की कोशिश में लगे थे, जगदीश के व्यवहार से दुखी कोई उसकी तरफ देख भी नहीं रहा था. वो लोग श्याम को हॉस्पिटल ले गए और जगदीश को वहीँ छोड़ दिया और कुछ समय के बाद जगदीश की मौत हो गयी और श्याम की जान लोगों ने बचा ली. 

दोस्तों आज जहाँ जगदीश के कर्मों ने उसकी जान ले ली वहीँ श्याम के कर्मों ने उसकी जान बचा ली. दोस्तों किसी चीज की लालच में किये गए बुरे कर्मों का परिणाम भी बुरा होता है, यहाँ कर्मों की सजा हर किसी को मिलती है, और यही मैंने इस कहानी के माध्यम से आपलोगों को बताने की कोशिश की है.

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