Thermometer: History and working (जानें क्या है थर्मामीटर का इतिहास और काम करने का तरीका)

दोस्तों, अक्सर जब भी आपको बुखार आता होगा या आप इसे फील करते होंगे तो सबसे पहले आप ये confirm होने के लिए की आपको बुखार है भी या नहीं, आप अक्सर थर्मामीटर का उपयोग करते हैं. आज मैं आपको थर्मामीटर (Thermometer) की खोज कब हुई और इसके काम करने के तरीके के बारे में इस ब्लॉग के माध्यम से बताने जा रहा हूँ. 

History 

सन 1709 में पहली बार Daniel Gabriel Fahrenheit (डेनियल गैब्रियल फॉरेनहाइट), जिनका जन्म 24 मई, 1686 को पोलैंड में हुआ था, ने एक कांच के bulb और tube में alcohol (अल्कोहल) का इस्तेमाल करके पहले थर्मामीटर का निर्माण किया था. परंतु अल्कोहल का boiling point (क्वथनांक) (78.37°C ) कम होने के कारण ये थर्मामीटर अत्यधिक तापमान को नापने में असफल था. सन  1714 में  Fahrenheit ने अल्कोहल की जगह mercury (पारा) का इस्तेमाल किया, जिसका boiling point लगभग 356.7°C होता है, जो अत्यधिक तापमान नापने में सक्षम था. और सन 1717 में थर्मामीटर का Fahrenheit ने लोगों के इस्तेमाल के लिए Amsterdam में पहली बार sell किया था. बाद में इसका इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पे किया जाने लगा. 

Descriptive Image of Thermometer

Working 

एक थर्मामीटर में मुख्यतः एक glass tube होता है जो एक glass bulb से जुड़ा होता है, थर्मामीटर के glass bulb में mercury/alcohol जमा होती है. जब भी थर्मामीटर को किसी वस्तु का तापमान नापने के लिए थर्मामीटर को उस वस्तु के संपर्क में लाया जाता है तो bulb में जमी mercury/alcohol तापमान में विर्धि के कारण पिघलकर glass tube में फैलने लगती है और हम glass tube के साथ चिह्नित scale के माध्यम से उस वस्तु के तापमान को आसानी से जान सकते है. एक mercury थर्मामीटर के तापमान मापने की क्षमता −37°C से 356°C तक होती है और glass tube में nitrogen gas की मदद से इसकी क्षमता और भी बढ़ायी जा सकती है. और एक alcohol थर्मामीटर के तापमान मापने की क्षमता −200°C से 78°C तक की होती है. थर्मामीटर का इस्तेमाल मुख्यतः वाष्प, तरल पदार्थ, और शरीर का तापमान नापने के लिए किया जाता है.

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