जानें क्या है कृत्रिम उपग्रह प्रणाली (Artificial Satellite System) | Technology


दोस्तों आपलोंगों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellite) के बारे में नहीं सुना होगा, आज की डिजिटल दुनियां में Satellite का अपना अलग ही role है, और किसी भी प्रकार के डिजिटल कम्युनिकेशन Satellite के माधयम से ही किए जातें हैं और वर्तमान में हजारों कृत्रिम उपग्रह आवाज, वीडियो, और डाटा कम्युनिकेशन के लिए उपयोग में लाये जा रहे हैं. आज मैं इस ब्लॉग के माध्यम से कृत्रिम उपग्रह प्रणाली (Artificial Satellite System) के बारे में आपको विस्तृत जानकारी देने जा रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ की ये जानकारी आपको पसंद आएगी. 

Introduction 

कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellite) एक ऐसा मानव निर्मित यंत्र है जिसे विभिन्न उद्देश्यों से पृथ्वी के ऑर्बिट (कक्षा) में पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए राकेट के माध्यम से लांच किया जाता है. इसकी ऊंचाई, आकार, और बनावट इसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है पर निर्भर करता है. 

History of Satellite System 

दोस्तों, 4 अक्टूबर 1957 को सोवियत यूनियन (Soviet Union) ने पहले कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक 1 (Sputnik 1) को पृथ्वी से 577 किलोमीटर की ऊंचाई पे लांच किया था. और उसी साल सोवियत यूनियन ने अपने दूसरे कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक 2 (Sputnik 2) को 3 नवंबर 1957 में लांच किया जिसके साथ एक जीवित कुत्ता "Laika" को अंतरिक्ष में भेजा गया था परन्तु कुछ हीं मिनटों के बाद उस कुत्ते की मौत हो गयी थी. उसके बाद से लेकर आजतक वर्तमान में तीन हजार से भी ज्यादा उपयोगी कृत्रिम उपग्रह और छः हजार से भी ज्यादा space junk पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं. 

Parts of Satellite System 

  • Bus:  यह satellite की आधारभूत संरचना होती है जिसमे उपग्रह के पेलोड (main part) को फिट किया जाता है और जिससे satellite के दुसरे पार्ट्स जुड़े होते हैं.  
  • Computer system: Computer system एक कृत्रिम उपग्रह का important part है जो की उपग्रह को नियंत्रित करने और उसके तापमान, ऊंचाई, और ओरिएंटेशन की निगरानी करने में मदद करता है. 
  • Communication system: सभी कृत्रिम उपग्रह अपने ग्राउंड स्टेशन को transponder (transceiver of radio signals) की मदद से डाटा भेजने और प्राप्त करने को सक्षम होते हैं और जिसके लिए satellite dish का उपयोग एंटीना के रूप में किया जाता है. 
  • Attitude control system: यह system उपग्रह को सही दिशा में रखने में मदद करता है और इसके लिए light sensor का उपयोग उपग्रह की सही दिशा जानने के लिए, और gyroscope और rocket thruster का उपयोग उपग्रह की दिशा बदलने के लिए किया जाता है. 
  • Power supply: उपग्रह में निरंतर बिजली की आपूर्ति के लिए सोलर प्लेट और एनर्जी स्टोरेज बैटरी का उपयोग किया जाता है. जब उपग्रह पृथ्वी की परछाई के अंदर आ जाती है और जहाँ सूर्य का प्रकाश उपग्रह तक नहीं पहुँच पाता है वहां बैटरी में स्टोर हुई एनर्जी उपग्रह को बिजली की आपूर्ति करती है. 
  • Thermal control system: Thermal control system का उपयोग satellite system में उसके तापमान को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, क्यूंकि उपग्रह सूर्य के बहुत उच्च तापमान के संसर्ग में रहता है और इसके अंदर मौजूद एल्क्ट्रिकल पार्ट्स बहुत ही ज्यादा हीट उत्पन्न करते हैं जिससे उपग्रह के नुक्सान होने का खतरा बढ़ जाता है. और चुकी उपग्रह एक निश्चित तापमान की सिमा के अंदर ही सुचारु रूप से काम करती है, उपग्रह के तापमान को घटाने और बढ़ाने के लिए कोटिंग, मल्टीलेयर इंसुलेशन, Louver, रेडियेटर, हीट पाइप, और हीटर जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. 
  • Propulsion system: रॉकेट इंजन की मदद से उपग्रह को उसके orbit तक पहुँचाना और छोटे रॉकेट्स/Thrust की मदद से उसके पोजीशन को ठीक करना ही propulsion कहलाता है.

Image of Satellite system

Types of Satellite System

  • Communication satellite system: इस प्रकार के उपग्रह transponder की मदद से  radio signals के द्वारा डाटा भेजने और रिसीव करने का काम करते हैं.  
  • Navigation satellite system: इस प्रकार के उपग्रह का उपयोग पृथ्वी की भौगोलीय स्थिति का पता करने के लिए किया जाता है.   
  • Earth observation satellite system: पृथ्वी के मौसम और पर्यावरण की निगरानी और मानचित्र निर्माण जैसे कार्यों में इस उपग्रह की मदद ली जाती है.  
  • Weather satellite system: इस प्रकार के उपग्रह का उपयोग पृथ्वी के मौसम और जलवायु की वर्तमान स्थिति की निगरानी के लिए किया जाता है. 
  • International space station: यह पृथ्वी के लोअर ऑर्बिट, यानि पृथ्वी से 2000 किलोमीटर से कम ऊंचाई, पे स्थित एक स्पेस स्टेशन है इसका उपयोग मुख्यतः वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष यान प्रणालियों और उपकरणों के परीक्षण के लिए भी किया जाता है.
  • Astronomical satellite: इस प्रकार के उपग्रह का उपयोग अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे ग्रहों और ऑब्जेक्ट्स के अध्यन के लिए किया जाता है. 
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धन्यवाद्  

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1 Comments

  1. very informative...it's very interesting to know something new...thanks for sharing it...😊

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