भावनात्मक लगाव जरुरी है ।

"आजकल अंजू का मन कामों में नही लगता, सारे काम अधूरी छोड़ जाती है, अब इसे नौकरी पर रखने से कोई फायदा नहीं है" -  प्रिया ने झल्लाते हुए राघव को बोला। प्रिया की बातों पर राघव ने गुस्से में आकर अंजू को फ़ौरन फोन लगाया और अगले दिन से काम पर ना आने को कहते हुए उसने फ़ोन रख दिया। इधर अंजू को राघव का फ़ोन आने के बाद नौकरी जाने से ज्यादा दुःख इस बात से था की वो कल से राघव के बेटे चीकू से नहीं मिल पायेगी। दरअसल प्रिया और राघव के अपने-अपने नौकरी में व्यस्त रहने के कारण अंजू ही राघव के आठ साल के बेटे चीकू की सारी देखभाल करती थी, और चुकी चीकू को भी एक माँ का प्यार अंजू से ही मिलता था, दोनों के बिच एक अटूट भावनात्मक लगाव हो गया था ।

अगले दो तीन दिनों तक अंजू को काम पर न आता देख रात के खाने के वक़्त चीकू ने राघव से अंजू के ना आने के बारे में पूछा, जिसपर राघव ने चीकू को उसे नौकरी से निकाल देने की बात बताई । राघव का जवाब सुनने के बाद चीकू बेचैन हो उठा और खाना अधूरा छोड़ उदास मन से अपने कमरे में चला गया । चीकू अक्सर उदास रहने लगा पर राघव और प्रिया का अपने व्यस्तता के कारण चीकू की उदासी पर कभी ध्यान नहीं गया। एक दिन यु हीं राघव चीकू को अपने साथ बाहर घूमाने ले गया, तभी अचानक एक सिग्नल पे चीकू की नजर अंजू पे पड़ी। अंजू को देखते हीं चीकू चुपचाप बाइक से उतरकर अंजू के पास चला गया। राघव को चीकू के बाइक से उतरने का पता नहीं चल पाया, और वह सिग्नल हरी होने पर आगे बढ़ गया । 

इधर अंजू चीकू को सामने देख ख़ुशी से फुले नहीं समा रही थी, पर उसके मन में ये भी सवाल आ रहा था की चीकू अपने घर से इतनी दूर अकेला यहाँ क्या कर रहा है और उसने चीकू से पूछा की वो यहाँ अकेला क्या कर रहा है, जिसपे चीकू ने अंजू को सारी बात बताई, और कहा की वो वापस घर नहीं जाना चाहता वह अंजू के साथ ही रहना चाहता है। अंजू ने ये सोंचकर की कुछ समय चीकू के साथ बिताने के बाद शाम तक उसे अपने घर छोड़ आएगी चीकू को अपने साथ अपने घर ले गयी।  

उधर कुछ दूर आगे जाने के बाद जब राघव का ध्यान चीकू की तरफ जाता है जब वह चीकू को बाइक पे नहीं पाता है, वो फ़ौरन ही वापस उस सिग्नल की ओर मुड़ जाता है पर वापस आने पर सिग्नल के आस पास कहीं भी वो चीकू को नहीं पाता है । चीकू को बहुत ढूंढने के बाद भी चीकू के नहीं मिलने पर वो थाने में रिपोर्ट कर परेशान उदास घर वापस आ आ जाता है । प्रिया और राघव उदास घर में बैठे चीकू के कहीं से भी वापस आ जाने की आश लगाए चीकू का इंतज़ार करने लगते हैं । 

Emotions
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इधर चीकू अपने माता-पिता को भूलकर अंजू के साथ खुश था और अपने घर वापस नहीं जाना चाहता था, शाम होने पर अंजू चीकू को ये बोलकर की वो भी चीकू के साथ उसी के घर पे रहेगी, चीकू को वापस घर जाने के लिए राजी करती है, और उसे उसके घर वापस लेकर जाती है । चीकू के इन्तज़ार में उदास बैठे राघव और प्रिया चीकू को सामने देख बहुत ही खुश होते हैं, और अंजू का बहुत धन्यवाद  करतें हैं । 

चीकू को उसके घर पहुँचाकर जब अंजू वापस जाने लगती है तो चीकू फिर से अंजू के साथ जाने की जिद करने लगता है, और राघव और प्रिया के लाख समझाने पर भी अपनी जिद नहीं छोड़ता है। चीकू के जिद से प्रिया गुस्से में आकर अंजू से बोलती है की "आखिर तुमने ऐसा क्या किया की चीकू का लगाव हमलोगों से भी ज्यादा तुमसे हो गया" . प्रिया की बातों पे अंजू प्रिया से बोलती है - "कुछ भी तो नहीं बस चीकू को हमने थोड़ा सा प्यार दिया, उसका ख्याल रखी, और उसके ख़ुशी और ग़म के पीछे छुपी भावनाओं को समझने की हमेशा कोशिश की, इससे ज्यादा मैंने कुछ भी तो नहीं किया" . अंजू की बातों को सुनने के बाद प्रिया और राघव दोनों खमोश हो जाते हैं, और उन्हें यह अहसास होता है की उन्होंने चीकू को सारी ख़ुशी तो दी, पर समय के आभाव के कारण कभी भी उन्होंने चीकू के साथ वो भावनात्मक लगाव नहीं बना पाया, जो उन्हें चीकू के साथ बनानी चाहिए थी, और इसी वजह से  हीं चीकू सारी सुविद्याओं और अपने माता-पिता को भुला कर एक नौकरानी के साथ ज्यादा खुश था । और अपने बेटे की ख़ुशी के लिए दोनों ने अंजू को फिर से काम पर रख लिया। 

दोस्तों, चाहे जीवन में रिश्ते कितने भी सगे क्यों न हो जब तक उन रिश्तों में भावनात्मक लगाव नहीं होता, तब तक उन रिश्तों की कोई कीमत नहीं रहती ।

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धन्यवाद् 

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4 Comments

  1. You are right, emotional attachment is very important in every relationship...very nice story 😊

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  2. In present scenario, this kind of topics are necessary.... Thanks to write on such kind of topic....

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