Global Positioning System (GPS) Technology: विस्तृत जानकारी

दोस्तों, आपलोंगों में सभी ने GPS system का नाम जरूर सुना होगा और मोबाइल फ़ोन में इसका इस्तेमाल भी किया होगा, आज मैं आपको GPS system की विस्तृत जानकारी देने जा रहा हूँ, जिसे पढ़कर आप इस सिस्टम के को ज्यादा अच्छे से समझ पाएंगे। 

Introduction 

GPS (Global Positioning System) एक ऐसी प्रणाली है जिसकी मदद से किसी भी व्यक्ति/वस्तु की वास्तविक स्थिति, गति, और समय का पता लगाया जा सकता है. यह प्रणाली मुख्यतः सॅटॅलाइट पर आधारित एक navigation technology है जो कम्युनिकेशन के लिए माइक्रोवेव सिग्नल्स का इस्तेमाल करता है. टोटल 33 सैटेलाइट्स इस टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल किये गए हैं जिसमे 31 सैटेलाइट्स पृथ्वी की ऑर्बिट में हैं और जिनकी दुरी पृथ्वी से लगभग 20,000 किलोमीटर है, और ये सारे सैटेलाइट्स पुरे दिन यानि 24 घंटे में 14,040 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से  पृथ्वी की ऑर्बिट में पृथ्वी के दो चक्कर लगाते हैं.

Definition 

Global Positioning System (GPS) एक नेविगेशन प्रणाली है जो सैटेलाइट्स और माइक्रोवेव सिग्नल्स (जिसमे गति, समय, स्थान, और दिशा की जानकारी उपलब्ध होती है) की मदद से किसी भी व्यक्ति/वस्तु की वास्तविक स्थिति, गति, और समय का पता कर सकता है.

History 

इस टेक्नोलॉजी को पहली बार साल 1978 में United State of America के द्वारा लांच किया गया था और इसका सन्चालन United State Space Force, America के द्वारा किया जाता है. इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पहले सिर्फ अमेरिकन मिलिट्री के लिए किया जाता था पर 16 सितम्बर 1983 को अमेरिका के 40वें तत्कालीन राष्ट्रपति, Ronald Reagan, के द्वारा इस टेक्नोलॉजी को सार्वजनिक रूप से भी इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी गयी. फिलहाल GPS system का इस्तेमाल दो प्रकार की सेवा के लिए किया जाता है: (1) Military service और (2) Civilian service. Civilian GPS service का इस्तेमाल पूरी दुनिया में किया जाता है वहीँ Military GPS service का इस्तेमाल अमेरिकन फाॅर्स और कुछ मान्यता प्राप्त एजेंसियों के द्वारा हीं किया जाता है. 

Parts of GPS System 

ग्लोबल पोजिशनिंग प्रणाली में मुख्यतः तीन प्रकार के उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है: 
  • GPS Control Segments: यह एक ग्राउंड स्टेशन है जो GPS सैटेलाइट्स की मूवमेंट्स को ट्रैक करने, उसके द्वारा किये जा रहे सिग्नल ट्रांसमीशन की निगरानी करने के अलावा सॅटॅलाइट का एनालिसिस और सॅटॅलाइट को सिग्नल और कमांड भेजने का काम करता है. GPS control segments और सैटेलाइट्स के बिच टू-वे कम्युनिकेशन होती है, मतलब यह सॅटॅलाइट को सिग्नल भेज भी सकता है और सॅटॅलाइट से सिग्नल प्राप्त भी कर सकता है. पृथ्वी पर एक master control segments और एक alternate master control segments जो की अमेरिका में स्थित है के अलावा टोटल 27 कमांड, कण्ट्रोल, और मॉनिटरिंग साइट्स हैं. इस  segment पर United State Space Force, America का अधिकार है.   
  •  GPS Satellites (Space Segment): GPS satellites का इस्तेमाल मुख्यतः माइक्रोवेव सिग्नल्स के ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है. यह GPS Control Segments और GPS receiver दोनों को डाटा सिग्नल ट्रांसमीट करता है. 
  •  GPS receiver (User Segment): दोस्तों GPS receiver सॅटॅलाइट से प्राप्त हुए माइक्रोवेव सिग्नल्स के आधार पर और सिग्नल ट्रासंमिशन के समय और सिग्नल प्राप्त होने के समय का अंतराल, सिग्नल की स्पीड, सिग्नल में मौजूद सॅटॅलाइट की दिशा और लोकेशन को डिकोड कर आपको आपकी वास्तविक लोकेशन और आपके गति की जानकारी देता है. इस प्रोसेस में सॅटॅलाइट और GPS receiver के बिच वन-वे कम्युनिकेशन होती है, मतलब सिर्फ सॅटॅलाइट GPS receiver को सिग्नल भेजता है, GPS receiver सॅटॅलाइट को सिग्नल नहीं भेज सकता. GPS receiver इस काम के लिए चार GPS satellites के सिग्नल्स प्रयोग करता है.  

Working of GPS System 

दोस्तों आइये अब एक प्रोसेस की मदद से GPS system के काम करने के तरीके के बारे में जानते हैं. मान लीजिये कोई यूजर जिसके पास GPS receiver उपकरण /मोबाइल फ़ोन मौजूद है और वो अपने लोकेशन और स्पीड की जानकारी चाहता है और इसके लिए वो अपने GPS receiver/मोबाइल फ़ोन के GPS बटन को ऑन मोड में करता है. तो तुरंत ही GPS receiver अपने नजदीकी चार GPS Satellites से सिग्नल प्राप्त करना शुरू कर देता है और उन चारों सैटेलाइट्स से प्राप्त हुए माइक्रोवेव सिग्नल्स के आधार पर और सिग्नल ट्रासंमिशन के समय और सिग्नल प्राप्त होने के समय के अंतराल, सिग्नल की स्पीड, सिग्नल में मौजूद सॅटॅलाइट की दिशा और लोकेशन को डिकोड कर आपको आपकी वास्तविक लोकेशन और आपके गति की जानकारी GPS receiver/मोबाइल फ़ोन के स्क्रीन पे देता है. खुले आसमान में इसके द्वारा मिली जानकारी की accuracy आपके actual position के 16 feet के radius के अंदर ही होता है. परन्तु किसी बिल्डिंग, पूल, या पेंड़ के अंदर इसकी accuracy सिग्नल ट्रांसमिशन में डिस्टर्बेंस की वजह से कम हो जाती है.

   

GPS Technology
Image by Clker-Free-Vector-Images from Pixabay 

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