लालच का परिणाम (Result of Greed) | Hindi Story

एक छोटे से गाँव में जयदेव नामक किसान रहता था, जयदेव बहुत ही मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था, उसके छोटे से परिवार में उसकी दूसरी पत्नी रमा और बेटी राधा थी. रमा बहुत ही लालची स्वभाव की औरत थी, और हमेशा उसके मन में अमिर बनने के सपने चलते रहते। जयदेव चुकी एक किसान था, उसकी आय ज्यादा नहीं थी जिसके कारण जयदेव को अक्सर रमा के गुस्से का शिकार होना पड़ता, वह रमा के लालची स्वभाव के कारण बहुत दुखी भी रहता था. 


जयदेव खेती से जो भी पैसे कमाता, उसमे से वो कुछ पैसे अपनी बेटी राधा के विवाह के लिए भी जमा करता था. समय के साथ अब राधा भी बड़ी हो गयी थी और जयदेव को अब हर समय राधा के ब्याह की चिंता रहती. चूँकि जयदेव आर्थिक रूप से उतना संपन्न नहीं था की राधा का विवाह वो किसी बड़े परिवार में कर सके, जयदेव और रमा ने पास के शहर में एक गाँव वाले के बताने पे अपनी ही बराबरी के एक अनाथ लड़के सागर से राधा का ब्याह तय कर दिया और कुछ दिनों के बाद राधा की शादी सागर के साथ कर दी. राधा का पति सागर भी जयदेव की तरह ईमानदार और मेहनती था वह एक ठेकेदार के यहाँ मुंशी का काम करता था. राधा का ससुराल अपने मायके से भी कम संपन्न था और राधा को अक्सर घर चलाने में पैसों की दिक्कत आती रहती थी.


जयदेव को राधा की गरीबी का एहसास था और जब कभी राधा मायके आया करती जयदेव उसे कुछ पैसों की मदद कर दिया करता था. जयदेव का राधा को अक्सर यूँ पैसे देना रमा को बिल्कुल भी पसंद नहीं था और वो हमेशा इस बात पे जयदेव से झगड़ा किया करती, पर जयदेव ने कभी राधा को इन सब बातों का एहसास नहीं होने दिया। एक बार जब राधा अपने मायके से ससुराल के लिए घर से निकली ही थी की, इधर रमा ने जयदेव से झगड़ा शुरू कर दीया । घर से कुछ दूर पहुँच जाने पर राधा को याद आया की वो अपने पिताजी के दिए हुए पैसे तो घर पर ही भूल गयी, और वो उस पैसे को लेने बिच रास्ते से घर के लिए लौट गयी. राधा जब घर के दरवाजे पे पहुंची तो उसे जयदेव और रमा के झगड़े की आवाज सुनाई दी जिसमे रमा जयदेव के द्वारा राधा को दिए गए पैसों पे जयदेव को खरी खोटी सुना रही थी. राधा अपनी सौतेली माँ की बातें सुनने के बाद बहुत दुखी हुई और रोते-रोते मन में ऐसा सोंच कर की वो कभी अपने मायके नहीं आएगी बिना पैसे लिए घर के दरवाजे से ही अपने ससुराल को लौट गयी.


इधर राधा के पति सागर की मेहनत रंग लाने लगी थी, और उसके साइट पे जो भी अधिकारी निरिक्षण के लिए आता उसके काम के प्रति उसकी ईमानदारी और काम की गुणवत्ता को देखकर खुश हो जाया करता, धीरे धीरे सागर की पहचान बहुत से सरकारी अधिकारियों से हो गयी थी. एक बार उन्ही अधिकारियों में से एक इंजीनियर ने उसे अपने घर पर बुलाया। सागर के वहां जाने के बाद इंजीनियर ने उससे पूछा की "तुम अपनी खुद की ठेकेदारी क्यों नहीं करते" उसपर सागर ने जवाब दिया की "उसके पास ठेकेदारी के कागजात और लाइसेन्स बनवाने के पैसे नहीं हैं और ऐसे भी ये सब काम पहुँच वालों को मिलता है". उस इंजीनियर ने इस काम में सागर की मदद की और उसे छोटे मोटे काम भी दिलवा दिया करता. चूँकि सागर के काम की गुणवत्ता औरों के मुकाबले सर्वश्रेष्ठ थी, कुछ समय के बाद उसे बड़े-बड़े काम मिलने लगे और धीरे-धीरे कुछ सालों में ही वो शहर का सबसे बड़ा ठेकेदार बन गया. अब राधा की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी, उसके पति सागर की गिनती शहर के अमीरों में होने लगी थी।


ReHisVention Image  of Greed

उधर लालची रमा इस बात से खुश रहा करती की अब जयदेव की कमाई के सारे पैसे उसके ही हाथों में आते थे. एक बार जयदेव को सागर के अमिर होने की बात कहीं से पता चली और जयदेव मन-ही-मन बहुत खुश हुआ और भगवान् का शुक्रिया अदा किया पर रमा के मन में राधा के आमिर होने पर राधा से और जलन होने लगी और मन-ही-मन अपने किस्मत को पहले से भी ज्यादा कोशने लगी.


इधर सागर ने शहर में एक आलिशान माकान खरीद लिया था और चुकी राधा ने गृहप्रवेश का न्योता अपने मायके भी भेजा था, गृहप्रवेश के दिन जयदेव और रमा राधा के घर पर आये, रमा राधा के आलिशान घर के देखकर हैरान थी और उसके मन में भी ऐसा घर पाने का लालच जाग उठा. रमा राधा के घर में मिले आराम के कारण अपने गाँव वापस नहीं जाना चाहती थी. और इसके लिए वो राधा के सामने अपनी गलतियों की माफ़ी मांगकर घड़ीयाली आंसू बहाने लगी और बोली - "बेटी राधा तुम्हारे सिवा हमलोगों का इस दुनिया में ख्याल रखने वाला कौन है, मैं अब कुछ दिन तुम्हारे साथ ही बिताना चाहती हूँ, गाँव में अकेलापन काटने को दौरता है ". रमा की बातों को सुनकर राधा भावुक हो गयी और उसने अपने पिता को यहीं उसके घर में कुछ दिनों तक रहने का आग्रह किया।


जयदेव रमा की सारी बात समझ रहा था और चुकी वह एक स्वाभिमानी व्यक्ति था, इसलिए उसने राधा को यह कहकर मना कर दिया की वहां खेतों में बहुत काम पड़े हैं और वो अपनी गाय को भी पड़ोसी के देखरेख में छोड़कर आया है, अगर रमा यहाँ कुछ दिन रहना चाहती है तो रह ले, वो नहीं रुक पायेगा । राधा ने अपने पिता की बात मान ली और जयदेव अगले सुबह रमा को वहीँ छोड़कर अपने गाँव लौट आया.


इधर रमा की लालच वहां के ठाठ बाट को देखकर दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रही थी, और एक दिन उसने सागर की सारी संपत्ति को अपनी बनाने की सोंची। उसके मन में ये विचार आया की अगर सागर की मौत हो जाती है तो वो यहाँ भी पुरे दौलत की अकेली मालकिन हो जायेगी, बेटी राधा और जयदेव तो सीधे हैं उन्हें कुछ समझ भी नहीं आएगा और वो लोग भी गाँव की तरह यहाँ भी उसके आदेश को मानेंगे और वो सागर की दौलत से मनमानी करेगी। उसने इसके लिए एक कार मकेनिक को बहुत सारे पैसों का लालच देकर अपनी मदद के लिए तैयार किया और एक रात दोनों ने मिलकर सागर की कार का ब्रेक फ़ेल कर दिया। अगली सुबह सागर जल्दी उठकर रोज की तरह अपने कार से काम को निकल पड़ा और ब्रेक फ़ेल होने के कारण उसके कार का एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गयी.


पति की मौत के बाद राधा हमेशा बेसुध रहती और अपनी माँ को ही अपना सबसे बड़ा हमदर्द समझती, पर रमा उसकी भावनाओं का गलत इस्तेमाल करती और राधा से अक्सर पैसे लेकर अपनी मनमानी करती। कुछ दिनों के बाद जब जयदेव को इन सब बातों का पता चला तो उसके मन में रमा के प्रति शक की भावना जाग उठी. और चुकी वह रमा की रग-रग से वाकिफ था, वो फ़ौरन शहर के लिए निकल पड़ा. राधा जयदेव को अपने घर में सामने पाकर उससे लिपटकर फुट-फुट कर रोने लगी और वहीँ सामने खड़ी रमा जयदेव से नजरें चुराने की कोशिश कर रही थी. रमा के इस करतूत से जयदेव का शक यकीन में बदल चूका था. उस रात रमा के सो जाने के बाद जयदेव राधा के कमरे में गया और राधा को रमा की गिरी हुई सोंच और लालची स्वभाव के बारे में सारी बात बताई जो उसने पहले कभी राधा को नहीं बताई थी और उसने ये भी बोला की उसे तो रमा पर शक भी है.


जयदेव की बात सुनने के बाद जब राधा ने अपने पति के मौत से लेकर आज तक के रमा के करतूतों पे गौर किया तो उसे भी दाल में कुछ काला नजर आने लगा. अगली सुबह जब रमा सो ही रही थी की जयदेव और राधा चुपके से पुलिस थाने गए और वहां रमा के खिलाफ एक केस दर्ज करवा दिया। कुछ समय के बाद रमा जब सोकर उठी तो देखा जयदेव और राधा पुलिस वालों को लेकर घर के अंदर आये हुए हैं. पुलिस को देखकर रमा के हाँथ पैर फूलने लगे और उसने डर से अपने सारे जुर्म कबूल कर लिए. पुलिस रमा को लेकर चली गयी और कुछ दिनों के बाद कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा दे दी. रमा को उसकी लालच ने जीवन भर के लिए जेल में डाल दिया और इधर जयदेव आपने गाँव को छोड़कर शहर में ही बेटी के साथ रहने लगा और वहीँ अपना एक व्यवसाय शुरू कर दिया। अब राधा और जयदेव दोनों ख़ुशी ख़ुशी अपनी जिंदगी बिताने लगे और रमा जीवन भर अपने किये पे रोती रही.


दोस्तों हमें अक्सर ये सुनने को मिलता है की "लालच बुरी बला है" और ये सच भी है की इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन उसके मन में बैठा उसका लालच ही होता है. लालच ही इंसान को गलत काम करने पे मजबूर करता है. 


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