जीत के लिए संघर्ष जरूरी है (Struggle and Life) | Hindi Story

समर ये सोचकर हमेशा घमंड करता था की पढाई के बाद उसे औरों की तरह नौकरी के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा, बिना संघर्ष किये पढाई ख़त्म होने के बाद वो अपने पिता जी की कंपनी ज्वाइन कर लेगा. पर जब तक उसकी पढाई ख़त्म होती, दुर्भाग्यवश इधर उसके  पिता जी की कंपनी दीवालीया हो चुकी थी. समर को इस बारे में पता नहीं था. आज समर विदेश से अपने  घर वापस आने वाला था, एयरपोर्ट पे उसके पिताजी उसका  इंतज़ार कर रहे थे. वो फ्लाइट से उतरने के बाद पिताजी के साथ घर की ओर चल पड़ा और मन ही मन यह सोंच रहा था की कुछ दिन आराम करने के बाद ही वो पिताजी के साथ ऑफिस ज्वाइन करेगा । उसके पिताजी ने भी उसे इस बारे में कुछ बताया नहीं था और चुकी समर को कोई टेंशन न हो, वो इस बारे में समर को कुछ बताना भी नहीं चाहते थे. 

कुछ  दिन बीत जाने के बाद जब समर अक्सर अपने पिताजी को घर में ही देखता तो उसने जाकर अपनी माँ से पूछा - "माँ आजकल पिताजी ऑफिस क्यों नहीं जाते", पहले तो उसकी माँ ने उसके बातों को अनसुना कर दिया, पर समर के बार बार पूछे जाने पर उसकी माँ ने कहा - "अब तेरे पिताजी की कंपनी उनकी नहीं रही उसका मालिक कोई और हो गया है, कंपनी की नीलामी हो गयी". अपनी माँ की इन बातों को सुनते हीं समर को मानो सांप सूंघ गया। कुछ समय के बाद समर अपने पिता जी के पास गया और उनसे माँ से सुनी बातों के बारे में पूछा, समर की बात सुनकर पिताजी के आँखों में आंसू छलक आये और उन्होंने कहा - "हाँ सब कुछ ख़त्म हो गया मैंने जीवनभर मेहनत करके जो भी हासिल किया था सब एक झटके में लूट गया, और अब तो बस तेरा ही सहारा है, तू कही जल्द एक अच्छी सी नौकरी पकड़ ले तभी ये घर ठीक ठाक चल पायेगा, मेरे अंदर अब उतनी ताकत नहीं रही की मैं अब नौकरी कर पाऊँ" ।  समर अपने माँ और पिता की बातों को सुनने के बाद बहुत परेशान हो उठा और उसे यही चिंता हो रही थी की अब उसे भी औरों की तरह नौकरी ढूंढनी पड़ेगी ।  

समर ने नौकरी के लिए अलग अलग कंपनियों में अपनी अर्जी डालनी शुरू कर दी, और उनके जवाब का इंतजार करता रहता और किसी कंपनी से अगर इंटरव्यू के लिए कॉल आता तो वह इंटरव्यू देने भी जाया करता, ये सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा पर उसे कहीं से कोई सफलता नहीं मिली, लगातार मिलती असफलता से वो मानसिक रूप से परेशान रहने लगा. दोस्तों, समर को उसके जीवन के कुछ दिनों के संघर्ष ने हीं उसे अंदर से खोखला कर दिया था और वह अपने जीवन से हार मान चूका था. वो एक दिन अपने घर से आत्महत्या करने के इरादे से निकला और अचानक सड़क पे एक तेज रफ़्तार कार के सामने आ गया. आननफानन में वहां मौजूद आस पास के लोग उसे हॉस्पिटल लेकर गए. समर के एक्सीडेंट का पता चलने के बाद परिवार के लोग भी हॉस्पिटल पहुंच गए. इस एक्सीडेंट में समर की जान तो बच गयी पर अभी उसे कुछ दिनों तक हॉस्पिटल में ही रहना था. दो-तीन दिनों के बाद जब डॉक्टर ने उसके परिवार वालों को समर से मिलने की अनुमति दी तो समर के माँ और पिता दोनों समर के पास गए. अपने माँ पिता को सामने देखकर समर फूटफूटकर रोने लगा और अपने पिताजी से बोला - "मैं आपकी उम्मीद पे खड़ा नहीं उतर पाया पापा", समर के पिताजी ने उसे अपने सीने से लगाकर उसे हिम्मत दी.

अगले सुबह जब समर नींद से उठा तो देखा की उसका सर उसके पिताजी की गोद में था, थोड़ी देर के बाद समर ने अपने पिता से पूछा - "पापा मैं एक छोटी सी नौकरी ढूंढते-ढूंढते जीवन से हार मान गया, आपने कैसे इतनी बड़ी कंपनी बना ली थी, जरा अपने जीवन के बारे में मुझे भी तो बताइये". तब उसके पिता ने उसे बताया की बचपन में उनके गाँव में बाढ़ आ जाने के कारण अपना सब कुछ खो देने के बाद वो मजबूरीवश शहर आये थे, शहर आने के बाद उन्होंने पेट पालने के लिए एक साइकिल की दूकान पे पंचर बनाने का काम शुरू किया, पर कुछ दिनों के बाद दूकान के मालिक ने चोरी का इल्जाम लगाकर उन्हें काम से हटा दिया था, उसके बाद वो घर-घर घूमकर लोहे की कबाड़ी इकठ्ठा करते और उसे कबाड़ी की दूकान में बेचा करते और इस काम से धीरे-धीरे उनके पास कुछ पैसे भी जमा होने लगे थे और कुछ दिनों के बाद उन्होंने उस जमा पैसों से एक ठेला खरीद लिया जिससे वो ज्यादा कबाड़ी इकठ्ठे कर सकें, कुछ सालों तक ऐसे हीं काम करने के बाद जब उनके पास कुछ ज्यादा पैसे इकठ्ठे हो गए तो उन्होंने एक कबाड़ी की दूकान खोल ली और धीरे धीरे अपनी मेहनत से कबाड़ी की दूकान से एक छोटी सी लोहे के सामानों फ़ैक्ट्री और उस फैक्ट्री से एक बहुत बड़ी इस्पात कंपनी के मालिक होने तक का सफर उन्होंने समर को बताया, और उन्होंने ये भी बताया की अपने जीवन में उन्होंने कई बुरे दौर देखे पर संघर्षशील होने के कारण उनके मन में कभी आत्महत्या का विचार नहीं आया वो हमेशा अपने बुरे दौर में भी अपने जीवन से लड़ते रहे क्यूंकि उन्हें अपने संघर्ष पे भरोशा था

Image of Struggle

 पिता की कहानी सुनने के बाद समर को ये एहसास हुआ की जितना संघर्ष उसके पिता ने अपने जीवन में किया है उसके सामने उसका संघर्ष तो कुछ भी नहीं ही. और उसने मन ही मन विचार किया की ठीक होने के बाद वो दिन रात मेहनत करेगा और अपने पिता को उनके हांथों खोई हुई कंपनी उन्हें गिफ्ट करेगा । हॉस्पिटल से निकलने के बाद समर ने संघर्ष को ही अपना जीवन मान लिया और उस कंपनी को वापस पाने के लिए वो दिन रात मेहनत करने लगा और बहुत सालों की मेहनत के बाद वो फिर से अपने पिता की कंपनी को वापस लाने में सफल रहा, पर तब तक उसके पिता का देहांत हो चूका था. एक तरफ तो उसे इस बात की बहुत ख़ुशी थी की उसने उस कंपनी को वापस अपना बना लिया था पर दूसरी तरफ ये भी मलाल था की उसकी इस सफलता को वो अपने पिता के साथ शेयर नहीं कर सकता था. अब समर जीवन के संघर्ष की भट्टी में तपकर खरा सोना बन चूका था, अब उसके सामने कोई भी समस्या आ जाए उसे थोड़ी भी घबराहट नहीं होती थी. 

दोस्तों, आज के समय के बच्चे हर समय सफल ही होना चाहते हैं, और असफलता मिलने पर बहुत जल्द निराश हो जाते है और निराशा में कुछ गलत कदम भी उठा लेते हैं, ऐसा इसलिए क्यूंकि उन्हें बचपन से बड़े लाड़-प्यार से पाला जाता है, उनके सामने उनके माता पिता हर मुंहमांगी चीज उपलब्ध करवा देते हैं, उन्हें बचपन से किसी चीज के लिए संघर्ष करना नहीं सिखाया जाता, जबकि जीवन जीने के लिए संघर्ष करने की इक्षाशक्ति का होना बहुत जरुरी है इसलिए हमें अपने बच्चों को इसके लिए भी तैयार करना चाहिए ताकि वो जीवन में कैसी भी परिस्थति आये उसका सामना डटकर कर सकें ।  

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