सच्ची शिक्षा । A Story on True Education

दिनेश अपने संयुक्त परिवार में एकलौता कमाने वाला सदस्य था। वह पुलिस विभाग में थानेदार की पोस्ट पर कार्यरत था। परिवार बड़ा होने के कारण जितनी तनख्वाह उसे मिलती थी, वह परिवार चलाने के लिए काफी नहीं होती थी। इसलिए वह यह जानते हुए भी की रिश्वत लेना बुरी बात है, वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए रिश्वत लेने से नहीं हिचकिचाता।  वह भले ही अपनी नौकरी के प्रति ईमानदार ना हो, पर वह अपने परिवार के प्रति बहुत ईमानदार था। 

एक बार उसके थाने में  किसी बड़े ठेकेदार ने अपनी निजी दुश्मनी का बदला लेने के लिए अपने पड़ोसी अध्यापक मुकुंद बाबू पर जान से मारने की कोशिश करने का एक झूठा केस दर्ज करवाया और दिनेश को मुकुंद बाबू को इस केस में बुरी तरह से फ़साने के लिए मोटी रकम की रिश्वत दी, आज दिनेश बहुत सारे पैसे मिलने के कारण बहुत खुश था, और ठेकेदार को अब इस मामले में तनाव मुक्त रहने को बोलकर उसे थाने से विदा किया । 

अगले दिन जब दिनेश उस केस में मुकुंद बाबू को गिरफ़्तार करने उनके घर पहुंचा, तब उसके सामने धर्मसंकट की स्थिति पैदा हो गयी, दरअसल दिनेश ने भी मुकुंद बाबू से ही अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी। मुकुंद बाबू के द्वारा ये पूछे जाने पर की वो उनके घर किस कारण आया है, दिनेश ने उन्हें सारी बात बताई, जिसपर मुकुंद बाबू ने उससे कहा की इस केस में मुझे झूठा फसाया जा रहा है, और तुम भी तो मुझे भली भांति जानते हो की मैं किस प्रकृति का व्यक्ती हूँ । दिनेश सारी सच्चाई को जानते हुए भी चुकी वो उस ठेकेदार से पैसे ले चूका था, मुकुंद बाबू को गिरफ्तार करना उसकी मजबूरी थी। पर दिनेश मुकुंद बाबू को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं उठा पा रहा था, और मुकुंद बाबू को गिरफ्तार करते वक़्त उसके हाँथ कांपने लगे । 

मुकुंद बाबू ने दिनेश का हाँथ काँपता देख दिनेश से पूछा - तुम्हारे हाँथ क्यों काँप रहे ? जिसपर दिनेश ने मुकुंद बाबू को अपनी मनःस्थिती बताई और उनसे कहा - गुरूजी मैं बहुत बड़े धर्मसंकट में फंस गया हूँ, मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ, मुझे पता है की आपने ऐसा कुछ नहीं किया होगा इसलिए आपको गिरफ्तार नहीं कर पा रहा, परन्तु चुकी मैंने उस ठेकेदार से मोटी रकम की रिश्वत ली है और उसे भरोशा भी दिया है, तो ये सोंचकर भी मन विचलित हो रहा की मैं उसे क्या जवाब दूंगा । 


सच्ची शिक्षा । A Story on True Education


दिनेश की बातों को सुनने के बाद मुकुंद बाबू ने उससे कहा - ठीक है चुकी तुमने उससे रिश्वत लिए हैं, तो तुम मुझे गिरफ्तार कर थाने ले चलो पर उससे पहले तुम्हे मेरे कुछ सवालों के जवाब देने होंगे, जिसपर दिनेश ने सर झुकाते हुए हामी भरी। मुकुंद बाबू ने उससे पूछा की जब तुम्हे सरकार की तरफ से वेतन मिलते ही हैं, तो फिर क्यों तुम रिश्वत लेने का पाप करते हो। जिसपर दिनेश ने मुकुंद बाबू को कहा की चुकी मेरा परिवार बड़ा है और मेरी तनख्वाह से उनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती, इसलिए मुझे रिश्वत लेना पड़ता है। फिर मुकुंद बाबू ने उससे पूछा की मान लो कभी दुर्भाग्यवश तुम्हे रिश्वत लेने के मामले में जेल जाना पड़े, तो क्या जिस परिवार की ख़ुशी के लिए तुम ये गलत काम कर रहे हो, वो परिवार वाले तुम्हारे पाप का भागिदार बन तुम्हारे साथ जेल जायेंगे ? 

मुकुंद बाबू की बातें सुनकर दिनेश गहरी चिंता में पड़ गया, उसके पास मुकुंद बाबू के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था और वो मुकुंद बाबू को बिना कुछ बोले चुपचाप अपने घर चला गया । रात को जब दिनेश खाने पर बैठा, तो उसे चिंतित देख उसकी पत्नी ने उससे उसके चिंता का कारण पूछा। जिसपर दिनेश ने अपनी पत्नी से ये सवाल किया की - जिस रिश्वत के पैसे से मैंने तुम सभी को इतनी शानो-शौकत की जिंदगी दी है, अगर उसी रिश्वत के पैसे  को कमाने के मामले में मुझे कभी जेल हो जाती है, तो क्या तुम सभी मेरे साथ जेल चलोगे ? दिनेश का सवाल सुनते ही उसकी पत्नी ने तुरंत "ना" में जवाब दिया और यह कहा - तुम्हारे पाप में हम क्यों भागिदार बने। 

पत्नी की बात सुनते ही दिनेश की आँखें खुल चुकी थी वह पुरी रात जाग कर सुबह होने का इंतज़ार करने लगा और अगले दिन सुबह होते ही सबसे पहले वो ठेकेदार से मिले रिश्वत के पैसे उसे वापस करने के बाद मुकुंद बाबू के पास जाता है और उनसे कहता है - गुरूजी मुझे आपके सवालों के जवाब मिल गये अब मैं कभी रिश्वत नहीं लूंगा, आज आपने फिर से मुझे जीवन की एक सच्ची शिक्षा देकर मुझे सही रास्ते पर ला खड़ा किया है, अब ईमानदारी से जो भी कमाऊंगा उसी से अपने और अपने परिवार का गुजारा करूँगा, और यह बोलकर दिनेश उनके चरणों में गिर गया। जिसपर मुकुंद बाबू ने उसे उठाकर अपने सीने से लगा लिया और उसे उसके उज्जवल भविष्य के लिए उसे ढेरों आशीर्वाद दिए, और अब दिनेश एक ईमानदारी की जिंदगी जीने लगा ।

दोस्तों इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है कि भले ही आपने अपनों की ख़ुशी के लिए कोई गलत काम किये हो, पर उस गलत काम की सजा आपको अकेले ही भुगतनी पड़ती है, उसमे आपके अपने शामिल नहीं होते।

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1 Comments

  1. Instructive story...Today I got a very good education from your article…Thanks for this!

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