क्या होते हैं एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह )? What is Asteroid in Hindi

Hello Friends, हमलोग सभी एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) के बारे में अक्सर सुनते रहते है और आप में से बहुतों को इसकी जानकारी भी होगी, और अगर नहीं तो ये ब्लॉग पोस्ट आपको एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) को विस्तृत रूप से जानने में आपकी मदद करेगा। जैसा की मैंने अपने पिछले ब्लॉग पोस्ट "धूमकेतु क्या है ?" में बताया था की धूमकेतुओं का निर्माण वर्तमान से 4.6 बिलियन वर्ष पूर्व सौर मंडल के निर्माण के समय उनके बचे अवशेषों से हुआ था, उसी प्रकार एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) का निर्माण भी उसी समय सौर मंडल के बचे अवशेषों से ही हुआ है। परन्तु दोनों के गुण और मूल क्षेत्र (origin) अलग अलग हैं, जिसे मैं आपको इस ब्लॉग पोस्ट के अंत में विस्तृत रूप से बताऊंगा। तो आइए अब एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

क्या है एस्टेरॉयड?

दोस्तों, एस्टेरॉयड सौर मंडल के निर्माण के समय उनके अवशेषों, पत्थर और धातुओं, के गठन से निर्मित वायुहीन खगोलिय पिंड हैं, जो मुख्य ग्रहों के तरह ही सूर्य की परिक्रमा करते हैं, इसलिए इन्हे क्षुद्रग्रह भी कहा जाता है। इनका आकार अनियमित (irregular) होता है, हालाँकि कुछ एस्टेरॉयड गोल आकार के भी होते हैं। यह एक दीर्घवृताकार पथ पर सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

दोस्तों, जैसे धूमकेतुओं का मूल क्षेत्र Kuiper Belt है, वैसे ही एस्टेरॉयड या क्षुद्रग्रहों का मूल क्षेत्र मंगल (Mars) और बृहस्पति (Jupiter) ग्रह के बिच का क्षेत्र है, जिसे एस्टेरॉयड बेल्ट कहा जाता है। एस्टेरॉयड बेल्ट में लाखों की संख्या में क्षुद्र ग्रह मौजूद हैं, परन्तु वर्तमान में ज्ञात एस्टेरॉयड की संख्या 992,153 के आस पास है। एस्टेरॉयड बेल्ट सूर्य से 2.2 AU (एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट) से 3.2 AU की दूरी पर मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बिच फैला हुआ है। 

दोस्तों, सर्वप्रथम 1801 ईस्वी में पहले एस्टेरॉइड सीरीस (Ceres) की खोज एक इटालियन खगोल वैज्ञानिक Giuseppe Piazzi के द्वारा की गयी थी, जिसकी त्रिज्या 476 किलोमीटर है। यह एस्टेरॉयड बेल्ट में मौजूद सबसे बड़ा object है, जिसे बाद में बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया। यह सौर मंडल के आंतरिक हिस्से में मौजूद एकमात्र बौना ग्रह है। 

सीरीस (Ceres) को बौने ग्रह की श्रेणी मे रखे जाने के बाद वर्तमान में ज्ञात एस्टेरॉयड्स में सबसे बड़ा एस्टेरॉयड Vesta, जिसका व्यास 530 किलोमीटर है, और सबसे छोटा एस्टेरॉयड 2015TC25 है, जिसका व्यास 2 मीटर है। दोस्तों आपको ये जानकर हैरानी होगी की सौर मंडल में मौजूद सभी ज्ञात एस्टेरॉयड का संयुक्त भार पृथ्वी के चन्द्रमा के भार से कम है। 

Asteroid

रचना के आधार पर एस्टेरॉयड का वर्गीकरण

सौर मंडल में मौजूद क्षुद्र ग्रहों को उनकी रचना और घटक के आधार पर तीन भागों - C-type, S-type, और M-type एस्टेरॉयड, में वर्गीकृत किया गया है। 
  • Chondrite (C)-type asteroids: इस प्रकार के एस्टेरॉयड का निर्माण चिकनी मिट्टी और सिलिकेट चट्टानों के गठन  से हुआ है, जो दिखने में dark होते हैं। इस प्रकार के एस्टेरॉयड सौर मंडल में मौजूद सबसे प्राचीन एस्टेरॉयड्स हैं और सौर मंडल में इस प्रकार के एस्टेरॉयड्स सबसे ज्यादा की संख्या में मौजूद हैं । 
  • Stony (S)-type asteroidsइस प्रकार के एस्टेरॉयड का निर्माण सिलिकेट, निकेल, और लोहे की गठन से हुआ है। इस प्रकार के एस्टेरॉयड की संख्या सौर मंडल में मौजूद सभी एस्टेरॉयड की संख्या का 17% है। 
  • Metallic (M)-type asteroids: इस प्रकार के एस्टेरॉयड का निर्माण निकेल और लोहा जैसे धातुओं के गठन से हुआ है।

Asteroid Belt and Trojan

सौर मंडल में क्षुद्रग्रहों का क्षेत्र

  • Main asteroid belt: यह क्षुद्रग्रहों का मुख्य क्षेत्र है, जो मंगल और वृहस्पति ग्रह के बीच सूर्य से 2.2 AU से 3.2 AU की दूरी पर  स्थित है।  अनुमानतः इस क्षेत्र में 1 किलोमीटर से ज्यादा व्यास वाले एस्टेरॉयड की संख्या 1,100,000 से 1,900,000 के बिच है, और इससे कम व्यास वाले एस्टेरॉयड यहाँ लाखों की संख्या में मौजूद हैं।
  • Trojans: मुख्य एस्टेरॉयड बेल्ट से कुछ एस्टेरॉयड्स बृहस्पती ग्रह के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण इसके कक्ष की ओर आ गए हैं और ये एस्टेरॉयड्स सूर्य की परिक्रमा के लिए बृहस्पति ग्रह के कक्ष को ही share करते हैं, क्षुद्रग्रहों के ऐसे क्षेत्र को Trojans कहा जाता है। और बृहस्पति ग्रह के कक्ष में मौजूद क्षुद्रग्रहों के क्षेत्र को Jupiter Trojans कहा जाता है। Jupiter Trojans के अलावा सौर मंडल में  Mars और Neptune Trojans भी हैं, और इसके अलावा सौर मंडल में  Earth Trojan, जिसकी खोज NASA के द्वारा 2011 में की गयी थी, भी मौजूद है। 
  • Near-Earth asteroids: ऐसे एस्टेरॉयड जिनका कक्ष पृथ्वी के पास से गुजरता है या जो एस्टेरॉयड्स सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी के कक्ष को क्रॉस करते हैं उन्हें near-Earth एस्टेरॉयड्स के नाम से जाना जाता है। इनकी दूरी सूर्य से 0.983 और 1.3 AU के बीच होती है। वर्तमान में near-Earth एस्टेरॉयड्स की संख्या 20,000 से भी ज्यादा है।  

Near-Earth Asteroid

धूमकेतु और क्षुद्रग्रह में क्या अंतर हैं?

दोस्तों जैसा की मैंने इस पोस्ट के शुरुआत में बताया की क्षुद्रग्रह और धूमकेतु दोनों का निर्माण सौरमंडल के निर्माण के समय उनके बचे अवशेषों से हुआ है, परन्तु दोनों के गुण अलग अलग हैं , तो आईये जानते हैं क्षुद्रग्रह कैसे भिन्न है धूमकेतु से:  

  • सौर मंडल में धूमकेतु का मूल क्षेत्र सौर मंडल के बाहरी हिस्से Kuiper Belt में है, जिसकी सीमा Neptune ग्रह के कक्ष से शुरू होती है. 
  • धूमकेतु का व्यास औसतन 700 मीटर से 60 किलोमीटर के बीच होता है.
  • धूमकेतु का निर्माण बर्फ, चट्टान, और हाइड्रोकार्बन के गठन से हुआ है।  
  • धूमकेतु सूर्य के नज़दीक आने पर बर्फ के पिघलने के कारण अपना आकार बदलते रहते हैं।  

एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह)
  • एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) का मूल क्षेत्र सौर मंडल के आंतरिक हिस्से में मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच है, जिसे एस्टेरॉयड बेल्ट कहा जाता है। 
  • एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) का व्यास एक छोटे पत्थर के आकार से 530 किलोमीटर के बीच होता है.
  • क्षुद्रग्रह का निर्माण चट्टानों और धातुओं के गठन से हुआ है। 
  • एस्टेरॉयड के सतह ठोस और स्थायी होते हैं, ये अपना आकार नहीं बदलते। 




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