कुइपर बेल्ट: सौर मंडल के बाहर धूमकेतुओं की दुनिया।।

दोस्तों, मैं आज के इस ब्लॉग में सौर मंडल के एक ऐसे क्षेत्र के बारे में लिखने जा रहा हूँ, जिसकी सीमा सौर मंडल के आठवें ग्रह वरुण (Neptune) के कक्ष से सटे या सूर्य से 30 AU की दूरी से शुरू होकर सूर्य से 50 AU की दूरी पर ख़त्म होती है, इसे कुइपर बेल्ट के नाम से जाना जाता है। डोनट के आकार का यह क्षेत्र सौर मंडल का सबसे बड़ा क्षेत्र है। सूर्य से अत्यधिक दूरी होने के कारण कुइपर बेल्ट का क्षेत्र बहुत ही ठण्डा है और इसी कारण इस क्षेत्र में पाए जाने वाले ऑब्जेक्ट्स बर्फीले होते हैं। सौर मंडल का नौवां ग्रह प्लूटो भी कुइपर बेल्ट में ही स्थित है। कुइपर बेल्ट को ट्रांस-नेप्चूनियन क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। कुइपर बेल्ट में लाखों बर्फीले चट्टान, धूमकेतु, मौजूद हैं। 

कुइपर बेल्ट का नामकरण

कुइपर बेल्ट का नाम मैक्सिकन खगोल वैज्ञानिक Gerard Kuiper के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सन 1951 में पब्लिश हुए अपने एक रिसर्च पेपर में प्लूटो ग्रह से दूर सौर मंडल में अन्य ऑब्जेक्ट्स के होने का अनुमान लगाया था। इससे पहले सन 1940 में खगोल वैज्ञानिक Kenneth Edgeworth ने भी अपने रिसर्च में प्लूटो ग्रह के परे अन्य ऑब्जेक्ट्स होने का जिक्र किया था, इसलिए इसे Edgeworth-Kuiper बेल्ट के नाम से भी जाना जाता है।

दूरी और आकार

दोस्तों, कुइपर बेल्ट का आतंरिक हिस्सा सूर्य से 30 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट (AU) की दूरी या वरुण ग्रह के कक्ष के अंत पर शुरू होता है जो सूर्य से 50 AU दूर तक डोनट के आकार में फैला हुआ है। कुइपर बेल्ट सौर मंडल के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में लाखों की संख्या में ऐसे ऑब्जेक्ट्स हैं जिनका आकार 100 किलोमीटर से  बड़ा है। कुछ ऑब्जेक्टस जैसे प्लूटो ग्रह, इत्यादि का आकार 1000 किलोमीटर (600 माइल्स) से भी ज्यादा है।  दोस्तों, आपको या जानकर हैरानी होगी की कुइपर बेल्ट में मौजूद सभी ऑब्जेक्ट्स का वजन अनुमानतः पृथ्वी के वजन का 10% भी नहीं है। 

कुइपर बेल्ट

कुइपर बेल्ट का गठन

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार कुइपर बेल्ट का गठन एस्टेरॉइड बेल्ट की तरह ही सौर मंडल के निर्माण के समय बचे हुए छोटे बड़े बर्फीले चट्टानों के समूह से हुआ है। कुइपर बेल्ट धूमकेतुओं का मुख्य श्रोत है, इसके अलावा धूमकेतुओं का दूसरा श्रोत Oort Cloud भी है। कुइपर बेल्ट में पाए जाने वाले ऑब्जेक्ट्स को Kuiper Belt objects (KBOs) कहा जाता है। 

संरचना और विशेषताएं

बाहरी सौर मंडल में कुइपर बेल्ट एक डोनट की आकार में फैला एक बहुत बड़ा क्षेत्र है जहाँ प्लूटो सहित मिलियन की संख्या में बर्फीले चट्टान और कुछ बौने ग्रह हैं, जिन्हे Kuiper Belt objects के नाम से जाना जाता है। कुइपर बेल्ट के ज्यादातर ऑब्जेक्ट्स इसके मुख्य क्षेत्र या स्कैटर्ड डिस्क में पाए जाते हैं। स्कैटर्ड डिस्क कुइपर बेल्ट के मुख्य क्षेत्र के आसपास फैले हुए क्षेत्र को कहा जाता है। 

प्लूटो कुइपर बेल्ट में खोजा जाने वाला पहला ऑब्जेक्ट है जिसे 18 फरवरी 1930 को अमेरिकन खगोल वैज्ञानिक Clyde Tombaugh के द्वारा खोजा गया था। इसलिए प्लूटो को किंग ऑफ़ द कुइपर बेल्ट के रूप में भी जाना जाता है। यह कुइपर बेल्ट में पाया जाने वाला सबसे बड़ा ऑब्जेक्ट है, कुइपर बेल्ट में इसके समान के आकार का ऑब्जेक्ट Eris भी है, जो आकार में प्लुटो से थोड़ा छोटा है, पर इसका वजन प्लूटो से ज्यादा है। 

कुइपर बेल्ट में पाया जाने वाले ज्यादातर ऑब्जेक्ट्स के अपने चाँद भी हैं जो आकार में उस ऑब्जेक्ट्स से छोटे हैं और उनकी परिक्रमा करते हैं। Pluto, Eris, Haumea, और Quaoar कुइपर बेल्ट के ऐसे ऑब्जेक्ट्स हैं, जिनके अपने चाँद हैं। 

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की कुइपर बेल्ट की ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी। 


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