!! आत्मसम्मान !!

!! आत्मसम्मान !!


न ही शक्तिशाली, 
न ही वो जो धनवान है !
है जिन्दा वही, 
जिसका जिन्दा आत्मसम्मान है !!
चाटुकारिता करके तो, 
प्यादा भी बादशाह बन जाता !
पर है शूरमा वही, 
जिसे अपने बल की आन है !!
राहें जिसकी जितनी कठिन हुई, 
वो उतना हुआ बलवान है !
आसानी से जिसने सब कुछ पाया, 
उसने कहीं न कहीं खोया अपना मान है !!
अपना आत्मसम्मान बचाने को, 
कितनों ने जान गंवाया है !
रक्त के अंतिम कतरे से भी, 
इसका अंतिम मूल्य चुकाया है !!
मूल्य चुकाया है उन्होंने, 
अपनी आन, बान, और शान का !
मूल्य चुकाया है उन्होंने, 
अपने आत्मसम्मान का !!
जिसके अंदर भी यारों, 
जिन्दा खुद का सम्मान है !
उसके आँखों में विश्वास झलकता,
जग में खुद की पहचान है !!
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