!! अरे ओ मेरे वीर !!

 

अरे ओ मेरे वीर..

राहें जटिल देखकर, 

मत हो तू अधीर !

लड़ता जा, बढ़ता जा, 

अरे ओ मेरे वीर !! 

तू रणबाँकुरा, तू महाबली,

अयस है तेरा शरीर !

बहता जा धारों की तरह,

चट्टानों का सीना चिर !!

तेरे युद्धकौशल की बानगी,

दे सकल संसार !

तेरे बाहुबल की गाथा,

गाए हर एक सार !!

बनकर उभर तू ऐसा,

जैसे मेघ गगन में !

हुंकार भरे जब तू,

भय छा जाये शत्रु के मन में !!

गरुड़ सा तेज़ बन तू,

सुदर्शन सा हो तेरा धार !

की उतरे जब समरभूमि में तू,

मच जाए हाहाकार !!

तेरा बल हो अतुलित,

हो साहस अपरम्पार !

शौर्य तुम्हारा ऐसा हो,

जैसे दिनकर के रश्मि की धार !!

कर फतह हर संग्राम को,

तू बनकर एक शूरवीर !

लड़ता जा, बढ़ता जा,

अरे ओ मेरे वीर !!

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