!! दिल की दहलीज पर !!

दिल की दहलीज पर....


ऐसे रखा है कदम तूने, मेरे दिल की दहलीज पर...

जैसे अमावश की रात में, चँदा आ गया !

जबसे नसीब हुआ है मुझे, दामन ये तेरा...

एहसास हुआ की, खुदा आ गया !!

आज मुकम्मल हुई वो ख्वाहिश... 

जिसका मुझे वर्षों से इन्तेजार था !

माना की तुमने लगा दी, देर आने में...

पर मेरे खुदा पे, मुझे भी ऐतबार था !!

ऐतबार था, मुझे मेरे दिल पे...

जो बस तेरे लिए ही धड़कता था !

ऐतबार था मुझे मेरी इबादत पे...

जिसमे बस तेरा ही सजदा था !!

तेरे आने का इंतज़ार था...

मेरी नजरों को सदियों से !

न हो ऐतबार...

तो पूछ लो पवन के झोकों और बहती नदियों से !!

हुए पुरे आरजू मेरे, पूरा मेरा जहाँ हो गया !

तेरे आने की ख़ुशी में, न जाने मैं कहाँ खो गया !!

की भर आयी आँखें देखकर, खुदा की मेहर इस नाचीज़ पर !

की झुम उठा ये दिल, पाकर तुझे अपनी दहलीज पर !!

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