!! होली आयी !!

होली आयी...
 

प्रभु भक्ति के विजय का... 

त्यौहार है ये होली !

दे ख़ुशी, खुशियों पाने का... 

व्यापार है ये होली !!

होली है कहानी... 

प्रह्लाद के भक्ति की !

होली है कहानी...

परमेश्वर के शक्ति की !!

जब सतयुग में हिरणकश्यपु...

खुद को समझ बैठा था भगवान् !

जब भगवत भक्ति करने से... 

रोक रहा था अपने पुत्र को शैतान !!

कर हर छल प्रह्लाद से...

जब हार चूका था उसका मन !

किया याद बहन होलिका को... 

करने को ख़त्म, प्रह्लाद का जीवन !!

होलिका की बातों पर...

विशाल चिता बनायी गयी !

संग कर प्रह्लाद को... 

होलिका चिता पर बिठाई गयी !!

खुश था हिरणकश्यपु...

राहों का कांटा आज कटेगा !

होलिका बचेगी, वरदानी कम्बल से... 

और प्रह्लाद आज जलेगा !!

पर नारायण ही बस जानते थे...

होनी कुछ और होनी थी !

बचना था प्रह्लाद को... 

होलिका मौत के नींद सोनी थी !!

की जैसे ही उस चिता को... 

राक्षसों ने आग से जलाया !

प्रभु माया से मौसम बदला...

भयावह एक तूफ़ान आया !!

की होलिका पे लिपटा कम्बल...

प्रह्लाद को लिपट चूका था !

की जली उस चिता में होलिका... 

बदन राख बन सिमट चूका था !!

अगले दिन सूरज की किरणें... 

एक नयी सुबह लायी थी !

हुआ था विजय पुनः भक्ति का... 

की खुशियां हीं खुशियां छायी थी !!

उसी राख का तिलक लगाकर...

झूम उठे प्रभु के अनुयायी !

की मना जश्न भूलोक पर...

आज होलिका दहन कर होली आयी !!

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