!! नारी तेरे रंग अनेक हैं !!

 

नारी तेरे रंग अनेक हैं...


नारी तेरे रंग अनेक हैं,

पर हर रंग में, तेरा मन एक है !

तू माँ हो, बीवी हो, या बहन हो, 

हर रिश्तों के लिए, रहते इरादे तेरे नेक हैं !!


तुम्हारे ममता की गहराई,

समंदर से भी गहरा है !

तेरे त्याग की ऊंचाई के आगे,

आसमान भी बौना ठहरा है !!


तुम जग की पालनहार हो,

तुम सृष्टि का आधार हो !

पर जब क्रोध है तुम में आता,

तुम काली की अवतार हो !!


माँ के रूप में तुम, 

अपने बच्चे का संसार हो !

पत्नी के रूप में, 

तुम ही सच्चा प्यार हो !

बहनों के रूप में तुम, 

हर भाई का खुद्दार हो !

चाहे जो भी हो, 

तुम भावनाओं का भंडार हो !!

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