!! दिल ये मेरा !!

Poem: दिल ये मेरा

 मेरी वफ़ा की उम्र, मत पूछ मुझसे..

न जाने तू, की मेरा प्यार अमर है !

है आशियाना जहाँ, इस जहाँ में तेरा..

कहीं और नहीं, वो मेरा जिगर है !

तोड़ना है तो, कुछ और तोड़ो..

दिल ये मेरा तो, तेरा ही घर है !

ठोकरें मारती हो, जब तुम इसे..

लग जाती मेरे आँखों में, आंसुओं की झड़ है !

न जाने कब तू, इस दिल में आ बसी..

अब तो तड़प भी तू ही इसकी और तू ही सबर है !

कितनी नादान है तू, जो इसे नहीं जान पायी..

ये तेरे दिद को, फिरता दर-बदर है !

शौख है इसे, तुझे अपना बनाने का..

क्या इस माजरे की, कोई तुझको खबर है !

आँखों की पलकें, जब निहारती है तुम्हे..

न जाने क्यों ये कम्बख्त, हो जाता बेसबर है !

कहता तू ही पूजा इसकी, तू ही दुआ है..

तू मंदिर, तू मस्जिद, तू ही तो गिरिजाघर है !

तेरी खुशबु की महक से, दमक उठा है दामन इसका..

जानना चाहता है ये, क्या तुम्हे भी इसके जज्बातों की फ़िकर  है !

नादान सा है ये दिल मेरा... 

जो करता हर पल, तेरा ही जिकर है !

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