!! प्रभु राम सागर तट आये !!

प्रभु राम सागर तट आये...

 जब हाल माता जानकी की...

बजरंग पता कर के आये !

हो प्रशन्न, करने शिव पूजन...

प्रभु राम सागर तट आये !!

हुआ अनुष्ठान महाकाल का...

लिंग की स्थापना हुई !

अत्यंत भक्ति भाव से...

भोले की आराधना हुई !!

हुआ संपन्न शिव पूजन...

महादेव का जयकार हुआ !

की पार समंदर करने को...

बानर दल तैयार हुआ !!

पर प्रभु राम के सामने...

एक समस्या आन पड़ी थी !

मुश्किल था, पार करना सिंधु...

सागर में, उफान घड़ी-घड़ी थी !!

की देख लीला सागर की...

प्रभु मन ही मन मुस्काये !

प्रारम्भ किया 'कर' जोड़ विनती...

की शांत समंदर हो जाये !!

देख प्रभु राम की लीला...

लखन तनिक विचलित हुए !

न होता शांत, देख सागर को...

शेष क्रोध से लोहित हुए !!

कहा प्रभु को, छोड़ अब विनती...

उठाओ धनुष संधान करो !

की वीर नहीं करते हथजोड़ी...

सोख समंदर, समाधान करो !!

सुनकर लक्ष्मण की बातों को...

प्रभु अनुज को समझाए !

निति कहती रण तभी हो...

जब याचना समझ में न आये !!

कर कुछ दिवस तक याचना...

प्रभु ने धैर्य की पहचान दी !

की निभाने मानव धर्म को...

उन्होंने हर इम्तेहान दी !!

फिर भी दम्भी सागर को...

याचना प्रभु की समझ न आयी !

रघुवीर अत्यंत क्रोधित हुए...

की मही पर, विनाश की घटा छायी !!

देख प्रभु का प्रचंड रूप...

भय, तीनो लोकों में छाया !

दहल उठा सागर का मन...

की भागा प्रभु के शरण आया !!

भिक्षा दया की मांगकर उसने...

प्रभु आज्ञा का अनुसरण किया !

दे राह बानरी सेना को...

धन्य स्वयं का जीवन किया !!

---------------

------

Post a Comment

0 Comments