अभिमन्यु....

अभिमन्यु...

आज अर्जुन के रक्त में उफान आयी थी !

रणकौशल आज अभिमन्यु की तूफ़ान लायी थी !!

भेद रहा था चक्रव्यूह वो लगाकर पूरा जोर !

भाग रहे थे शत्रु, मचा था रण घनघोर !!

आँचल माँ की छोड़ कर, युद्ध कर रहा था किशोर !

शत्रु के काँप रहे थे रूह, न दिखेगा लगता कल का भोर !!

पर क्रूर नियति ने आखिर, चल दी थोड़ी टेढ़ी चाल !

फंस गया आखिर अभिमन्यु, सफल हुआ शत्रुओं का जाल !!

फिर भी उसके साहस ने, एक इतिहास रचाया !

हो जाने के बाद निहत्था, उसने पहिया रथ का घुमाया !!

किस्मत ने छोड़ा साथ उसका, लक्ष्य अधूरा रह गया !

शत्रुओं के हर वार को, अभिमन्यु गरज-गरज सह गया !!

पूर्व आरम्भ के अंत को पाया, ऐसी उसकी जवानी थी !

की कुरुक्षेत्र के रण में, अभिमन्यु को वीरगति पानी थी !!

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