छोड़ा था साथ मेरा...

छोड़ा था साथ मेरा...

 छोड़ा था साथ मेरा... 

उसने मुझे कुछ ये कहकर !

लौट आउंगी फिर...

तेरी राहों में मैं तक़दीर बनकर !!

इंतज़ार आज भी है उसका... 

जो बसी है मेरी आँखों में तस्वीर बनकर !

लुटाकर सब कुछ ठहरा हूँ... 

आज भी वहीँ मैं एक फ़कीर बनकर !!

बची है बस उसके यादों की दौलत...

दिल में मेरे जागीर बनकर !

छलक जाते हैं तड़प मेरे... 

रह रहकर मेरी पलकों से पीड़ बनकर !!

कर जाती है अक्सर घायल मुझे...

शोख अदाएं उसकी तीर बनकर !

की कैद कर लिया है उसके अक्स ने... 

मुझे अपनी बाँहों में जंजीर बनकर !!

छोड़ा था साथ मेरा... 

उसने मुझे कुछ ये कहकर !

लौट आउंगी फिर...

तेरी राहों में मैं तक़दीर बनकर !!

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1 Comments

  1. Intezaar me na yun samay jayar kr...
    Use bhi teri yaad aaye jindgi me tu kuch aisa kr...

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