एक मैं ही नहीं हूँ...

एक मैं ही नहीं हूँ...

एक मैं ही नहीं हूँ जख्मी...

यहाँ किसी के प्यार में !

न जाने कितने दिल हैं टूटे... 

इस इश्क़ के बाजार में !!

कितनों को मिले अश्क...

अपने सनम के ऐतबार में !

कितनों ने खोयी अपनी रातें... 

किसी बेवफा के इंतज़ार में !!

कितने यूँ हैं तनहा यहाँ...

एक बस आरजू-ए-यार में !! 

या हो गए शहीद कितने...

राहे वफ़ा की कतार में !

कितनों ने पाए हैं धोखे...

इस मोहब्बत के संसार में !!

न जाने कितने डूब चुके है...

इस इश्क़ के मजधार में !

एक मैं ही नहीं हूँ जख्मी...

यहाँ किसी के प्यार में !

न जाने कितने दिल हैं टूटे... 

इस इश्क़ के बाजार में !!

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2 Comments

  1. Sambhaal kr rakhna is tute hue dil ko....
    Koi to kharidaar milega is dil ka ishq k bazaar me....

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  2. Kya khoob likhe ho, Mohammad Rafi jaisa Dard bhara nagma pesh kr rahe ho, very good.

    Marvelous!
    Keep writing, you will also be famous.

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