होकर रुखसत भी...

होकर रुखसत भी...
 

होकर रुखसत भी तेरी दहलीज से... 

मेरे दिलों के ख्याल, अब भी वहीँ ठहरे हैं !

तू न कर यकीन, पर मेरे प्यार की गहराई...

तेरे दिए हर जख्मों से भी ज्यादा गहरे हैं !!

यहाँ हर पल मेरी जज्बातों पे... 

तेरी ग़मगीन यादों के पहरे हैं !

की रो देता हूँ, अक्सर सोंच कर यही...

तेरी मासूम सूरत में छिपे, न जाने कितने और चेहरे हैं !!

किया था मोहब्बत का वादा, तुमने मुझसे...

और सर पे रक़ीब के, तेरे नाम के सेहरे हैं !

देकर दुहाई, ज़माने के दस्तूर की...

क्यों तुमनेे हर बार, मेरे अरमानों को बिखेरे हैं !!

होकर रुखसत भी तेरी दहलीज से... 

मेरे दिलों के ख्याल, अब भी वहीँ ठहरे हैं !

तू न कर यकीन, पर मेरे प्यार की गहराई...

तेरे दिए हर जख्मों से भी ज्यादा गहरे हैं !!

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1 Comments

  1. Wah, Tum toh chha gaye
    Ekdm Rafi ke nakse kadam ja rahe ho.
    Well written.

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