कभी तो होगी रुखसत...

कभी तो होगी रुखसत...
 

कभी तो होगी रुखसत...

ये ग़मों की बरसात !

कभी तो होगी खुशियों से... 

अपनी भी मुलाकात !!

कभी तो खिलूँगा मैं भी...

फूल बनकर इस धरा पर !

कभी तो मिलूंगा मैं भी...

अपनी जिंदगी से मुस्कुराकर !!

कभी तो अपनी राहों से...

रुखसत ये कांटे होंगे !

कभी तो जीत की शोर होगी... 

ख़त्म हार के सन्नाटे होंगे !!

कभी तो मैं भी इस रण का... 

रणविजय कहलाऊंगा !

कभी तो अपने मकसद को...

मैं फतह कर जाऊँगा !!

कभी तो अपने भी जीवन में...

उल्लासों का बसेरा होगा !

कभी तो ख़त्म, ये काली रात होगी... 

कभी तो वो सुनहरा सवेरा होगा !!

कभी तो मिलेगा मुझे भी...

अपने किस्मत का साथ !

कभी तो होगी रुखसत...

ये ग़मों की बरसात !!

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4 Comments

  1. Lagega samay rukhsat hone me in gamo ki barsaat ko... tu mehnat karta jaa... rakh k apne drid apne aatmvishwas ko....

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  2. Jio Bhai
    Shandar likhe ho
    Beautiful composition
    ----will appear as a Romantic Poet.
    Keep continued your composition!
    May God bless you with your name and fame!

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