कैसे बयां करूँ तुझे...

कैसे बयां करूँ तुझे...

जिसे भुलाया न जा सके...

ईश्वर की वो कृति हो तुम !

आखिर कैसे बयां करूँ तुझे...

गजब की खूबसूरती हो तुम !!

तुम्हारे नयन ऐसे...

जैसे कोई मधुशाला हो !

होठों की कशिश ऐसी...

जैसे अमृत का प्याला हो !!

चेहरे की मुस्कराहट ऐसी...

जैसे खिल रहा हो कोई फूल !

वो मदमस्त तेरी अदाएं...

आखिर मैं कैसे जाऊं भूल !!

मैं कैसे भूल जाऊं...

तेरी नशीली निगाहें !

मैं कैसे भूल जाऊं...

तेरे घर को जाती राहें !!

कैसे भूल जाऊं मैं...

अपने इश्क़ की दास्तान को !

कैसे मिटा दूँ मैं आखिर...

अपने दिल-ए-नादान को !!

मिटाये नहीं मिटाया जा सके... 

मेरे जीवन की वो स्मृति हो तुम !

आखिर कैसे बयां करूँ तुझे...

गजब की खूबसूरती हो तुम !!

---------------

-----

Post a Comment

0 Comments