खुद को खुदा समझने वालों...

खुद को खुदा समझने वालों...

खुद को खुदा समझने वालों... 

मही पर खुदा का कहर देखो !!

हो रही बेमौत मौतें...

मिला हवा में जहर देखो !!

देखो भीख मांगती जिंदगी...

सिमटा घर में शहर देखो !!

मानव, मानव से भाग रहा...

खौफनाक ये मंजर देखो !!

काम नहीं आ रही दौलतें...

होती शोहरत बंजर देखो !!

डरती थी जिससे दुनिया कल तक...

आज उन्हीं का डर देखो !!

ये दृश्य उस अदृश्य का है...

त्याग घमंड का कर देखो !!

बस में नहीं है मानव के कुछ भी...

बात ये समझकर देखो !! 

क्यों आया है ऐसा जलजला...

ढूंढकर इसका जड़ देखो !!

खुद को खुदा समझने वालों... 

मही पर खुदा का कहर देखो !!

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2 Comments

  1. Wah, kya khoob likha, ekdm today's scenario pr likhe ho, keep writing.

    May God bless you!

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  2. Jaljale ka aur kehar ka bhi ant aega, dekhne ke liye kon bachega pta nahi...

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