न था....

न था....

मोहब्बत कर बैठा था उनसे... 

जिन्हे मुझपे ऐतबार न था !

लुटा दिया था उनपे ये दिल... 

जिन्हे मुझसे प्यार न था !!

खेल रहे थे वो खेल दगा का... 

फिर भी मुझे इनकार न था !

बाद करने के सबकुछ न्योछावर...

लबों पे उनके इजहार न था !!

की मिट चुकी थी उम्मीद दिलों की...

अब नजरों को उनका इंतज़ार न था !

मैं ढूंढ रहा था जैसी दुनिया... 

ये वैसा संसार न था !!

की मोहब्बत कर बैठा था उनसे... 

जिन्हे मुझपे ऐतबार न था !!

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